सरकार वित्तीय बाधाओं के बावजूद पिछले साल शुरू किए गए बजट ढांचे को जारी रखेगी- मुख्यमंत्री अब्दुल्ला
- Neha Gupta
- Jan 12, 2026

जम्मू, 12 जनवरी । जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि वित्तीय बाधाओं के बावजूद सरकार पिछले वर्ष शुरू किए गए बजट ढांचे को जारी रखेगी, चल रही योजनाओं की प्रगति सुनिश्चित करेगी और विकास को गति देने के लिए नई पहल शुरू करेगी। उन्होंने प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) को लेकर जम्मू के साथ भेदभाव के आरोपों को भी खारिज कर दिया और सवाल किया कि जब इस क्षेत्र में आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रमुख संस्थान स्थापित किए गए थे तब इस तरह की चिंताएं पहले क्यों नहीं उठाई गईं।
जम्मू जिले की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद यहां पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी और फरवरी बड़े फैसले लेने का सही समय नहीं है क्योंकि अभी किया गया कोई भी आवंटन मार्च में समाप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने बैठक में समीक्षा की है। प्रमुख निर्णय अगले वर्ष के बजट में शामिल किए जाएंगे।
जिले को आवंटित धनराशि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पहले ही उपयोग किया जा चुका है जबकि हम छोटी-मोटी कमियों को दूर कर रहे हैं।” अब्दुल्ला वजारत रोड स्थित अपने आधिकारिक आवास से उपायुक्त कार्यालय स्थित बैठक स्थल तक लगभग आधा किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, मंत्रिमंडल के मंत्री, मुख्य सचिव अटल धुलू और जम्मू जिले के विधायक उपस्थित थे।
“केंद्र सरकार से जितनी मदद मिले, उतना अच्छा होगा क्योंकि जम्मू-कश्मीर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। हम पिछले साल के बजट ढांचे को जारी रखेंगे, चल रही योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे और कुछ नई पहल शुरू करेंगे,” मुख्यमंत्री ने कहा।
उन्होंने बजट को लेकर धैर्य रखने का आग्रह करते हुए कहा, “यह संभव नहीं है कि मैं यहां खड़ा होकर आपको बजट के बारे में बताने लगूं।” जम्मू के साथ भेदभाव के आरोपों और भाजपा की प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) को कश्मीर से जम्मू स्थानांतरित करने की मांग के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि जब जम्मू को आईआईटी और आईआईएम मिले तो कश्मीर को क्या मिला। तो फिर आपने समानता की बात क्यों नहीं की। तो फिर आपने यह विवाद क्यों नहीं खड़ा किया कि दोनों जम्मू में नहीं खुलने चाहिए। उन्होंने कहा कि एक जम्मू में खुलना चाहिए और एक कश्मीर में। तब आपको बुरा नहीं लगा। अब जब राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की बात आती है तो आप भेदभाव देखते हैं। यह फैसला हम पर छोड़ दीजिए। अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि इसे कहां स्थापित किया जाए। हमें फैसला लेने दीजिए, फिर देखेंगे।



