शरद यादव की तीसरी पुण्यतिथि पर महागठबंधन नेताओ ने दी श्रद्धांजलि

सहरसा, 12 जनवरी (हि.स.)। सामाजिक न्याय के पुरोधा, मंडल मसीहा, वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रद्धेय शरद यादव की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर महागठबंधन के बैनर तले एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला परिषद उपाध्यक्ष धीरेंद्र यादव के आवास पर संपन्न हुआ। श्रद्धांजलि सभा में महागठबंधन में शामिल दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

सभा को संबोधित कर वक्ताओं ने कहा कि शरद यादव ने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कराने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने संसद से सड़क तक संघर्ष की राजनीति को मजबूती दी और वंचित समाज की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।

महागठबंधन के नेताओं ने सर्वसम्मति से श्रद्धेय शरद यादव को भारत रत्न देने की मांग करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कोशी क्षेत्र की बाढ़, विस्थापन, पुनर्वास, सिंचाई, सड़क और रोजगार जैसी समस्याओं को शरद यादव ने बार-बार संसद में उठाया। कोशी की पीड़ा को उन्होंने सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीनी आंदोलनों और संघर्षों के माध्यम से सरकारों को जवाबदेह बनाने का कार्य किया।

महिला आरक्षण बिल पर उनके विचारों को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शरद यादव महिला सशक्तिकरण के पक्षधर थे, लेकिन वे चाहते थे कि महिला आरक्षण का लाभ पिछड़ी, दलित, अति पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं तक भी सुनिश्चित हो। उनका मानना था कि सामाजिक न्याय के बिना महिला आरक्षण अधूरा है और इससे समाज के कमजोर वर्गों की महिलाएं हाशिए पर चली जाएंगी।

श्रद्धांजलि सभा में मौजूद नेताओं ने कहा कि महागठबंधन, श्रद्धेय शरद यादव के समाजवादी विचारों, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उनके बताए रास्ते पर चलकर ही एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार