नशे को बढ़ावा देने में नशा माफिया ही नहीं, राजनैतिक संरक्षण भी जिम्मेदार
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- Jan 17, 2026
मंडी, 17 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति, मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति, गुंजन संस्था धर्मशाला और जिला बाल संरक्षण विभाग मंडी के संयुक्त तत्वाधान में युवाओं में बढ़ते नशे को रोकने के लिए कार्य करने वाले स्रोत व्यक्तियों के लिए दो दिवसीय रिफ्रैशर प्रशिक्षण 17 व 18 जनवरी को साक्षरता भवन सौली खडड् में आयोजित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के पहले दिन राज्य स्तरीय समन्वय एजेंसी, गुंजन धर्मशाला से कन्सल्टेंट विजय कुमार, निदेशक पंकज पंडित और जिला बाल संरक्षण अधिकारी मंडी, एन.आर. ठाकुर, स्वास्थ्य विभाग मंडी से मोनोचिकित्सक डॉ. अनीता, शिमला से डॉ शशी भूषण, महिला एवं बाल विकास विभाग से रजनीश तथा राष्ट्रीय एथेलिट कोच भूपेन्द्र भूप्पी व हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने बतौर स्रोत व्यक्ति कार्याशाला में अपने विचार रखे। जिसमें नशे के विभिन्न पहलुओं, इसके बढ़ते इस्तेमाल और इससे होने वाले शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की गई।
स्रोत व्यक्ति ने बताया कि स्थितियाँ इतनी भयानक है कि भावी पीढ़ी नशे के चंगुल में बुरी तरह से बर्बाद होती जा रही है। उन्होंने बताया कि नशे को लेकर समाज में बहुत सारी भ्रान्तियां हैं। कुछ लोग नशे को श्रेणियों में बाँट कर उन्हें कम या ज्यादा खराब मानते हैं जबकि ऐसा नहीं है। हर तरह का नशा सेहत के लिए हानिकारक है। आम चलन में किया जाने वाला नशा बीड़ी-सिगरेट, गुटखा, खैनी शुरुआती नशे हैं जो आगे चलकर रासायनिक नशों तक पहुंचाने का दरवाजा है।
उन्होंने आगाह किया कि भूल से भी नशे का प्रयोग न करें क्योंकि एक बार नशा करने के बाद नशे के आदी होने की संभावनाएं रहती है। नशे को बढ़ावा देने के लिए केवल नशा माफिया ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि इसे राजनैतिक संरक्षण भी मिलता है। चिंतजनक बात यह है कि चुनावों में शराब के बाद अब चिट्टे जैसे खतरनाक और रासायनिक नशे का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। वहीं निजी शिक्षण संस्थानों, व्यावसायिक कॉलेजों में भी नशे का काफी चलन देखा जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा



