तीन साल में हिमाचल के स्वास्थ्य संस्थान होंगे विश्व स्तरीय उपकरणों से लैस : मुख्यमंत्री

शिमला, 18 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि जायका परियोजना के दूसरे चरण के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि आगामी तीन वर्षों में प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थानों को विश्वस्तरीय उपकरणों से लैस करने के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री शनिवार शाम शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे। इसमें प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक शामिल हुए।

यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री के साथ सीएमओ, बीएमओ और एमएस का सीधा संवाद हुआ। करीब साढ़े चार घंटे चले इस सत्र में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं, सुझावों और जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। कई मुद्दों पर मौके पर ही फैसले लिए गए और अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा और सीएमओ, बीएमओ व एमएस को अधिक वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे। प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए वित्तीय नियमों में भी जरूरी बदलाव किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों में स्वच्छता से जुड़े फैसलों और उससे संबंधित खर्च की शक्तियां सीएमओ को दी जाएंगी। इसके साथ ही एमएस और सीएमओ के लिए विशेष निधि का प्रावधान किया जाएगा, ताकि जरूरी खर्च समय पर किए जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि जॉब ट्रेनी डॉक्टरों के वेतन में बढ़ोतरी पर सरकार विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 236 चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है और 150 नए पद भी स्वीकृत किए गए हैं। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार, दोनों के अंकों को अंतिम परिणाम में शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि व्यवस्था परिवर्तन के तहत किए जा रहे सुधारों से एक वर्ष के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव दिखाई देगा और अगले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकसित किए जा रहे आदर्श स्वास्थ्य संस्थान इस दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे। इन संस्थानों में 15 साल पुराने उपकरण बदले जाएंगे और विश्व स्तरीय मशीनें लगाई जाएंगी। इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और डॉक्टरों पर काम का बोझ भी कम होगा। हर आदर्श स्वास्थ्य संस्थान में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी और इसके लिए एक्स-सर्विसमैन कॉरपोरेशन के माध्यम से सुरक्षा सेवाएं ली जाएंगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्रसव केंद्रों का युक्तिकरण तय मानकों के आधार पर किया जाएगा, ताकि सेवाएं अधिक प्रभावी और सुलभ बन सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्वास्थ्य भवनों का निर्माण कार्य 60 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, उन्हें 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी चिकित्सा उपकरण एम्स के मानकों के अनुसार खरीदे जाएंगे और सीटी स्कैन मशीनें दस साल की मरम्मत गारंटी के साथ ली जाएंगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट लैब जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। चमियाणा और टांडा अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है और अब तक चमियाणा में 120 सफल रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। यह सुविधा जल्द नेरचौक और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी शुरू होगी। स्मार्ट लैब स्थापित करने पर सरकार 75 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जहां एक ही ब्लड सैंपल से सभी जरूरी जांच संभव हो सकेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा