शिमला में बागवानी विकास के लिए 51.42 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना मंजूर

शिमला, 19 जनवरी (हि.स.)। जिला बागवानी विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन की वार्षिक योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना को उपायुक्त अनुपम कश्यप ने सोमवार को आयोजित एक विशेष बैठक में स्वीकृति प्रदान की। बैठक में बागवानी क्षेत्र से जुड़ी मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत कुल 51 करोड़ 42 लाख रुपये की वार्षिक योजना को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में सामान्य वर्ग के लिए 60 लाख रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 9 लाख 87 हजार रुपये की प्रस्तावित योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों और बागवानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बैठक में कहा कि बागवानी क्षेत्र इस समय कई गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। जलवायु परिवर्तन का सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है। समय पर बारिश और बर्फबारी न होने के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कारण अब कई बागवान पारंपरिक फसलों से हटकर वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सेब और फूलों के अलावा अब अन्य फलों की खेती में भी बागवानों की रुचि बढ़ रही है। यह बदलाव बाजार की मांग और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए हो रहा है। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों से बिना लाइसेंस पौधों की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि स्थानीय बागवानों के हितों की रक्षा की जा सके।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि शिलारू क्षेत्र में ब्लूबेरी की खेती का ट्रायल किया जा रहा है। बागवानी विभाग इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो जिले के अन्य बागवानों को भी इसका बड़ा लाभ मिल सकता है। ब्लूबेरी की बाजार में मांग काफी अधिक है और इसकी खेती में कम लागत में अच्छी आय की संभावना रहती है। विभाग ने इसके लिए स्थान का चयन कर लिया है और बाकी औपचारिकताओं को पूरा करने का काम जारी है।

उपायुक्त ने बागवानी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड स्तर पर जाकर लोगों को विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि जिले में कई लोगों के पास भूमि तो है, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से वे अपनी जमीन को आय का स्थायी साधन कैसे बना सकते हैं। कौन सी फसल उनकी भूमि और जलवायु के लिए उपयुक्त है, इसकी सही जानकारी देना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि यदि लोगों को सही मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग मिले तो बागवानी उनके लिए रोजगार और आजीविका का मजबूत साधन बन सकती है। इस दिशा में बागवानी विभाग के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिक से अधिक लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा