जम्मू-कश्मीर में बहुआयामी गरीबी वाले परिवारों की होगी घर-घर पहचान

जम्मू। स्टेट समाचार
जम्मू-कश्मीर में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उद्देश्य से बहुआयामी गरीबी (मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी) से प्रभावित परिवारों की घर-घर पहचान के लिए प्रस्तावित सर्वेक्षण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने योजना, विकास एवं निगरानी विभाग (पीडीएंडएमडी) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर प्रस्तावित प्रक्रिया की समीक्षा की। बैठक में वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, समाज कल्याण और ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा सभी जिलों के उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह पहल डेटा आधारित सुशासन और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक सटीकता के साथ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा तथा कोई भी जरूरतमंद परिवार वंचित नहीं रहेगा।
उन्होंने उपायुक्तों को योजना विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक मानव संसाधन की जरूरत का आकलन करने तथा सर्वेक्षण में शामिल कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में जनगणना के दोनों चरण पूरे होने के बाद, जिसमें घुमंतू एवं पशुपालक आबादी भी शामिल होगी, यह सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। योजना, विकास एवं निगरानी विभाग की आयुक्त सचिव आर. एलिस वाज ने बैठक में बताया कि प्रस्तावित सर्वेक्षण नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा विकसित राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल गरीबी के अनुमान प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उनके लिए लक्षित सरकारी हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
प्रस्ताव के अनुसार सर्वेक्षण के पहले चरण में अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लगभग 2.19 लाख लाभार्थी परिवारों को शामिल किया जाएगा। परिवारों का आकलन स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े 12 मानकों, जैसे पोषण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, स्वच्छ ईंधन, घरेलू संपत्तियां और वित्तीय समावेशन के आधार पर किया जाएगा। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक परिवार का बहुआयामी अभाव स्कोर तैयार होगा, जिसके आधार पर पात्र परिवारों की पहचान की जाएगी। बैठक में बताया गया कि सर्वेक्षण से तैयार होने वाला डिजिटल डेटाबेस स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, पेयजल, स्वच्छता, स्वच्छ ऊर्जा, आजीविका, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं के बेहतर समन्वय में सहायक होगा। साथ ही इससे सार्वजनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की निगरानी और जिला स्तर की योजनाओं को अधिक साक्ष्य आधारित बनाने में भी मदद मिलेगी।