हिमाचल में विक्रमादित्य सिंह की अफसरों पर टिप्पणी से सियासी घमासान, समर्थन में उतरे शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

शिमला, 16 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की बाहरी राज्यों के आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणी ने राज्य की सियासत और अफसरशाही दोनों में हलचल मचा दी है। इस बयान को लेकर जहां एक ओर नौकरशाही खुलकर सामने आ गई है, वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के भीतर भी मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। इस पूरे विवाद में अब शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में सामने आए हैं, जबकि इससे पहले सरकार के तीन मंत्री उनके बयान पर आपत्ति जता चुके हैं।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह एक कुशल और प्रभावी मंत्री हैं। उनका कहना है कि अगर किसी मंत्री के मन में किसी मुद्दे को लेकर कोई बात या संशय है तो उसका स्पष्ट होना जरूरी है। रोहित ठाकुर ने इस पूरे विवाद को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया है कि वह सरकार के मुखिया होने के नाते स्वयं इस मामले को स्पष्ट करें ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।

रोहित ठाकुर ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश के विकास में न सिर्फ़ प्रदेश के अधिकारियों बल्कि बाहर से आए अधिकारियों का भी अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में काम करने वाले अधिकारी सकारात्मक या नकारात्मक सोच के हो सकते हैं और यह जरूरी नहीं कि नकारात्मक सोच केवल बाहर से आए लोगों में ही हो।

इससे पहले विक्रमादित्य सिंह की टिप्पणी पर सरकार के तीन मंत्री सार्वजनिक रूप से असहमति जता चुके हैं। इनमें ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, राजस्व व बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी और शहरी विकास मंत्री राजेश धर्माणी शामिल हैं। इन मंत्रियों का कहना है कि अधिकारियों को उनके मूल राज्य के आधार पर निशाना बनाना उचित नहीं है और इससे प्रशासनिक तंत्र पर गलत संदेश जाता है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत 12 जनवरी को लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। इस पोस्ट में उन्होंने यूपी और बिहार के कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि ऐसे अधिकारी “हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं” और उन्हें प्रदेश के हितों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा था कि ऐसे अधिकारियों से समय रहते निपटने की जरूरत है, वरना हिमाचल के हित प्रभावित होंगे।

इस पोस्ट के सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में असहजता फैल गई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश में कार्यरत आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की शीर्ष संस्थाओं आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन और आईपीएस एसोसिएशन ने अलग-अलग सार्वजनिक बयान जारी कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा