आधे हिमाचल में माइनस पारा, 14 जनवरी तक सूखा रहेगा मौसम, कोहरे का अलर्ट
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- Jan 08, 2026
शिमला, 08 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में जनवरी की ठंड ने अपना सबसे तीखा रूप दिखाना शुरू कर दिया है और छह जिलों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है। कई अन्य इलाकों में पारा शून्य के आसपास बना हुआ है।
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार शिमला, मंडी, कुल्लू, सोलन, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और शीतलहर का असर अभी और बने रहने की संभावना है। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति का कुकुमसेरी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान माइनस 11.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन की अब तक की सबसे सर्द रात मानी जा रही है।
इसके अलावा ताबो में माइनस 8.9, कल्पा में माइनस 3.6, नारकंडा में माइनस 1.6, मनाली में माइनस 1.4, रिकांगपिओ में माइनस 1.3, भुंतर में माइनस 1.3, सोलन में माइनस 1.8, सुंदरनगर में माइनस 0.6, कुफरी में माइनस 0.8, बजौरा में माइनस 0.2 डिग्री सेल्सियस रहा। पालमपुर में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री, शिमला में 2.2, मंडी में 1.0, कांगड़ा में 0.6, हमीरपुर में 1.4, ऊना में 6.0, नाहन में 4.8, बिलासपुर में 2.5, जुब्बड़हट्टी में 4.0, कसौली में 3.8, पांवटा साहिब में 7.0, सराहन में 4.3, देहरा गोपीपुर में 6.0 और नरी में 3.5 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार राज्य का औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से करीब 1.9 डिग्री नीचे चल रहा है।
ठंड की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर में गंभीर शीतलहर, जबकि बिलासपुर, पालमपुर और बरठीं में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। आज राजधानी शिमला समेत अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ रहा और धूप खिली है, लेकिन सुबह और देर शाम ठंड का जबरदस्त प्रकोप सहन करना पड़ रहा है। बिलासपुर में घने कोहरे के कारण दृश्यता करीब 150 मीटर तक सिमट गई, जबकि पांवटा साहिब में हल्का कोहरा छाने से विजिबिलिटी लगभग 500 मीटर रही।
मौसम विभाग ने 12 जनवरी तक निचले और मैदानी इलाकों में सुबह, देर रात और तड़के अलग-अलग स्थानों पर घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है, वहीं अगले 24 घंटों में भी कुछ स्थानों पर शीतलहर चलने की चेतावनी दी गई है। पूर्वानुमान के अनुसार 8 से 14 जनवरी तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और मकर संक्रांति तक बारिश या बर्फबारी की कोई संभावना नहीं है।
लगातार सूखे मौसम का असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है, क्योंकि सितंबर के अंत में मानसून की विदाई के बाद से राज्य में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। लंबे ड्राई स्पेल के कारण रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और खेतों में नमी की कमी चिंता बढ़ा रही है। इसके साथ ही नदियों और खड्डों के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे जलविद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है और आने वाले दिनों में इसका असर ऊर्जा आपूर्ति पर गहराने की आशंका जताई जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा



