इस्तीफा दूंगा जरूर पहले तय हो जवाबदेही आगा रूहुल्लाह का फारूक अब्दुल्ला को पत्र

श्रीनगर, 28 अगस्त। नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर जारी राजनीतिक मतभेद शुक्रवार को उस समय और गहरा गए, जब श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की इस्तीफे की मांग का जवाब देते हुए कहा कि उनका इस्तीफा अवश्य आएगा, लेकिन उससे पहले जवाबदेही तय होनी चाहिए। रूहुल्लाह ने बताया कि उन्होंने डॉ. फारूक अब्दुल्ला को एक पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा, “निश्चिंत रहिए, इस्तीफा जरूर आएगा। आपके मांगने के बिना भी इस्तीफा आ जाता, लेकिन उससे पहले जवाबदेही तय होनी आवश्यक है।”रूहुल्लाह ने कहा कि वह अपने पत्र में उठाए गए सवालों पर पार्टी अध्यक्ष के जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए।


चुनावी वादों पर मांगा जवाब


श्रीनगर सांसद ने पूछा कि जब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, तब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 की बहाली का वादा क्यों किया था।
उन्होंने सवाल किया, “क्या हम ऐसे वादे कर रहे थे, जिनके बारे में हमें पहले से पता था कि उन्हें पूरा नहीं किया जा सकता या फिर उन्हें पूरा करने का वास्तव में हमारा कोई इरादा ही नहीं था?”
रूहुल्लाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं को केवल उस सीमा तक सीमित नहीं किया जा सकता, जितना देने के लिए भाजपा तैयार हो।


राज्य का दर्जा ही अंतिम लक्ष्य क्यों?


रूहुल्लाह ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला की उस कथित टिप्पणी पर भी सवाल उठाया, जिसमें अनुच्छेद 370 मांगने वालों को “दिल्ली से भीख मांगने” जैसा बताया गया था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और पूर्ण राज्य का दर्जा—दोनों ही मांगें केंद्र सरकार के समक्ष उठाई जा रही हैं। उन्होंने पूछा कि यदि राज्य के दर्जे की बहाली को ही जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक आकांक्षाओं की अंतिम सीमा मान लिया जाए, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख भाजपा से अलग कैसे रह जाएगा? रूहुल्लाह के अनुसार केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने तक राजनीतिक एजेंडे को सीमित करना अगस्त 2019 में किए गए संवैधानिक बदलावों को स्वीकार करने जैसा हो सकता है।


संवैधानिक सुरक्षा जरूरी


सांसद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जमीन, प्राकृतिक संसाधनों, संस्कृति, परंपराओं, भाषा, पर्यावरण, रोजगार और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा, राजनीतिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक प्रश्न है।
रूहुल्लाह ने यह भी याद दिलाया कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री रहते हुए तत्कालीन जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने स्वायत्तता प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने पूछा, “अब क्या बदल गया है—जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाएं या फिर उनके लिए खड़े होने की नेशनल कॉन्फ्रेंस की इच्छाशक्ति?”


पार्टी के भीतर आलोचना का भी उल्लेख


रूहुल्लाह ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने के कारण उन्हें पार्टी के अंदर आलोचना का सामना करना पड़ा है, लेकिन वह किसी राजनीतिक झूठ का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष से पूछने के लिए उनके पास अभी कई अन्य सवाल भी हैं, लेकिन वह पहले पत्र में उठाए गए प्रश्नों पर डॉ. फारूक अब्दुल्ला के जवाब की प्रतीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी यह जानने का अधिकार है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस वास्तव में किन मुद्दों और सिद्धांतों के साथ खड़ी है।


पृष्ठभूमि पर टिप्पणी का भी जवाब


रूहुल्लाह ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला की उस कथित टिप्पणी का भी जवाब दिया, जिसमें उनके नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से पहले की पहचान को लेकर सवाल किया गया था।
उन्होंने कहा कि वह शहादत की लंबी परंपरा वाले परिवार से आते हैं और डॉ. फारूक अब्दुल्ला स्वयं उनकी पृष्ठभूमि से परिचित थे। रूहुल्लाह ने कहा कि पार्टी में शामिल होने के लिए भी उन्हें डॉ. अब्दुल्ला ने ही आमंत्रित किया था।


फारूक अब्दुल्ला ने दी थी चुनाव लड़ने की चुनौती


इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने रूहुल्लाह को लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने और नया जनादेश प्राप्त करने की चुनौती दी थी। इसके जवाब में रूहुल्लाह ने कहा था कि वह कुछ दिनों में विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे। अब पत्र के माध्यम से जवाब देते हुए रूहुल्लाह ने संकेत दिया है कि वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उससे पहले पार्टी नेतृत्व को अनुच्छेद 370, चुनावी वादों और जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस घटनाक्रम ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर नेतृत्व और पार्टी की राजनीतिक दिशा को लेकर जारी मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। अब सभी की नजर डॉ. फारूक अब्दुल्ला के जवाब और रूहुल्लाह के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है।