आईआईटी खड़गपुर में गहन-प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर

आईआईटी खड़गपुर अनुसंधान उद्यान द्वारा आयोजित उद्यम पूंजी संगोष्ठीआईआईटी खड़गपुर अनुसंधान उद्यान द्वारा आयोजित उद्यम पूंजी संगोष्ठी

खड़गपुर, 09 जनवरी (हि. स.)। शैक्षणिक अनुसंधान और उद्योग जगत के बीच की दूरी को पाटते हुए गहन-प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर अनुसंधान उद्यान की ओर से गुरुवार रात कोलकाता परिसर में एक उच्चस्तरीय उद्यम पूंजी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देशभर से 30 से अधिक प्रमुख निवेशक समूहों ने सहभागिता की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विज्ञान एवं अभियांत्रिकी पर आधारित नवाचारों को प्रोत्साहन देना तथा उन्हें भारत सरकार के ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ाना रहा।

शुक्रवार सुबह 11.45 बजे आईआईटी खड़गपुर द्वारा प्रेस विज्ञप्ति द्वारा जानकारी साझा कर बताया गया, संगोष्ठी का उद्घाटन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने किया। अपने मुख्य संबोधन में उन्होंने कहा कि संस्थान अब केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर संपत्ति सृजन और सामाजिक प्रभाव का सशक्त केंद्र बन रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित अनुसंधान को जनोपयोगी और बाजार-उन्मुख समाधानों में रूपांतरित करना ही भविष्य के राष्ट्र निर्माण की सशक्त नींव है। आईआईटी खड़गपुर का उद्देश्य नवाचार के माध्यम से सामाजिक प्रभाव और राष्ट्रीय संपत्ति सृजन को गति देना है।

इस अवसर पर नवाचार एवं उद्यमिता के सहायक अधिष्ठाता प्रो. प्रजीत नंदी ने अनुसंधान उद्यान की कार्यक्षमताओं और लचीले सहयोग प्रारूपों की जानकारी दी, जो प्रारंभिक अवस्था के नवोदित उद्यमों के लिए जोखिम को कम करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। वहीं, नवाचार एवं उद्यमिता के सहायक अधिष्ठाता प्रो. मनोज के. मंडल ने अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना निधि की विस्तृत जानकारी साझा की, जिसके माध्यम से प्रारूप निर्माण और विस्तार के लिए औद्योगिक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

कार्यक्रम में संस्थान की प्रमुख नवाचार इकाइयों, कृषि-व्यवसाय संवर्धन प्रतिष्ठान तथा अंतरविषयक कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर-भौतिक प्रणाली केंद्र, को भी प्रस्तुत किया गया। इन इकाइयों को कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर-भौतिक प्रणालियों के क्षेत्र में उच्च प्रभाव वाले बौद्धिक संपदा आधारित नवाचारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया गया।

संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण “नवाचार से निवेश तक” विषय पर आयोजित गोलमेज परिचर्चा रही, जिसका संचालन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के निदेशक के कार्यालय प्रमुख अभ्रजीत साहा ने किया। परिचर्चा के दौरान शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत और निवेशकों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सार्थक सुझाव सामने आए। निवेशकों ने संस्थान के नवाचार परिवेश पर विश्वास व्यक्त करते हुए इसे गहन-प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और उच्च गुणवत्ता वाली बौद्धिक संपदा आधारित उद्यमों के लिए अनुकूल बताया।

कार्यक्रम का समापन सुनील कुमार गुप्ता, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी, मुख्य रणनीति, क्रियान्वयन एवं संचालन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर अनुसंधान उद्यान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने संगोष्ठी से प्राप्त रणनीतिक सुझावों को अमल में लाने तथा संस्थान की “प्रयोगशाला से धरातल तक” नवाचार श्रृंखला को और सशक्त बनाने के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई।

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता