कोरिया: सिंचाई और मछली पालन से दोहरी आमदनी कमा रहे वनवासी किसान
- Admin Admin
- Jan 12, 2026

बैकुंठपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। खेतों को समय पर पानी मिले तो किसान की मेहनत रंग लाती है और उसकी जिंदगी खुशहाल बनती है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चिल्का के वनवासी किसान गुरचरन सिंह की कहानी इसी सच्चाई को बयां करती है। कभी सिंचाई के अभाव में खेती से निराश होकर मजदूरी करने को मजबूर गुरचरन आज रबी फसल और मछली पालन से दोहरा लाभ कमा रहे हैं।
अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले गुरचरन सिंह के पास पारिवारिक बंटवारे में मिली लगभग पांच एकड़ कृषि भूमि है। पहले सिंचाई की सुविधा न होने के कारण वे पूरी तरह बारिश आधारित धान की खेती पर निर्भर थे। बारिश कम होने पर फसल खराब हो जाती थी और रबी की खेती की तो कोई संभावना ही नहीं रहती थी। ऐसी स्थिति में उन्हें परिवार का खर्च चलाने के लिए दूसरे के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी।
बीते वर्ष ग्राम पंचायत की कार्ययोजना बनते समय गुरचरन सिंह ने अपने निजी खेत में मनरेगा योजना के तहत डबरी निर्माण के लिए आवेदन किया। ग्राम सभा की अनुशंसा के बाद करीब दो लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति मिली और ग्राम पंचायत चिल्का को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी देखरेख में समय पर पूरा हुआ यह कार्य अब उनके खेतों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहा है। डबरी में पर्याप्त जलभराव होने से सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध हो गई है।
गुरचरन सिंह बताते हैं कि अब धान की फसल पानी की कमी से खराब नहीं होती और रबी मौसम में गेहूं की अच्छी पैदावार भी होने लगी है। घर की बाड़ी में आलू, टमाटर, मिर्च, प्याज और गोभी जैसी सब्जियों की खेती से हर सप्ताह आमदनी हो रही है, जिससे घरेलू खर्च आसानी से निकल जाता है। इसके साथ ही इस वर्ष डबरी में मछली के बीज डालकर उन्होंने मछली पालन भी शुरू किया है, जिससे अतिरिक्त आय का मजबूत साधन तैयार हो गया है।
सिंचाई सुविधा और बहुआयामी कृषि से गुरचरन सिंह अब न केवल आत्मनिर्भर बन गए हैं, बल्कि उनका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। उनकी सफलता अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह



