श्रम संहिताएं खदान श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देंगी: शोभा करंदलाजे
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- Jan 07, 2026

नई दिल्ली, 07 जनवरी (हि.स)। केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बुधवार को कहा कि श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन और प्रौद्योगिकी का उपयोग खान सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में एकसमान सुरक्षा मानक आवश्यक है।
शोभा करंदलाजे ने धनबाद स्थित मुख्यालय में खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के 125वां स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि डीजीएमएस की 125 वर्षों की यात्रा अधिकारियों और खदान श्रमिकों के समर्पित प्रयासों और बलिदान को दर्शाती है। उन्होंने अतीत में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वालों के योगदान को स्वीकार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आज खनन गतिविधियां भारत की विकास गाथा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने सभी खनन कार्यों में एकसमान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने में डीजीएमएस की भूमिका को रेखांकित किया तथा सुरक्षा मानदंडों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र-राज्य के समन्वित प्रयासों और डीजीएमएस के क्षेत्रीय कार्यालयों की मजबूत भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। श्रम सुधारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए शोभा करंदलाजे ने कहा कि चार श्रम संहिताओं ने 29 कानूनों को समेकित और प्रतिस्थापित किया, जिनका उद्देश्य विकसित भारत का निर्माण करना और संविदा श्रमिकों सहित सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने डीजीएमएस से इन संहिताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और खान सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने का आग्रह किया तथा अधिक सुरक्षित और सतत खनन के लिए डीजीएमएस को मजबूत करने के लिए मंत्रालय की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने जारी एक बयान में कहा कि 1902 में स्थापित डीजीएमएस भारत में खान सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों के विनियमन में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा खदान श्रमिकों के कल्याण और खनन उद्योग के सतत विकास में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। इस कार्यक्रम में डीजीएमएस के महानिदेशक उज्ज्वल ताह, श्रम और रोजगार मंत्रालय की संयुक्त सचिव दीपिका कच्छल, डीजीएमएस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रालय के अधिकारी, खनन उद्योग के प्रतिनिधि और इस क्षेत्र के हितधारक भी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर



