जम्मू-कश्मीर में ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं को समयबद्ध गति देने के निर्देश
- Rahul Sharma
- Aug 21, 2026
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर में नवीकरणीय ऊर्जा पहलों और उभरती ग्रीन एनर्जी नीतियों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभागों को संस्थागत समन्वय मजबूत करते हुए निर्धारित समयसीमा में परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने जिलेवार बायोमास सर्वेक्षण तय समय में पूरा करने तथा केंद्रीकृत ग्रीन लैंड बैंक के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि की तत्काल पहचान और स्क्रीनिंग करने को कहा। उन्होंने वन विभाग द्वारा तैयार जम्मू-कश्मीर के डिजिटल लैंड बैंक की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सौर, जल, पवन और बायोमास ऊर्जा की अपार क्षमता है, जिसे समयबद्ध कार्रवाई के जरिए व्यवहार्य परियोजनाओं में बदलने की जरूरत है। बैठक में फ्लोटिंग सोलर, लघु जलविद्युत परियोजनाओं, सरकारी भवनों के सोलराइजेशन, पवन ऊर्जा आकलन, स्मार्ट मीटरिंग, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायो-गैस बनाने जैसी पहलों की समीक्षा की गई। बताया गया कि डल झील में 100 किलोवाट के फ्लोटिंग सोलर पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के बाद जेकेएडा ने संभावित जल निकायों का प्री-फिजिबिलिटी सर्वे किया है। पांच जलाशयों की पहचान की गई है, जिनकी कुल संभावित क्षमता 83.51 मेगावाट है। इनमें गांदरबल की मानसबल झील में 34.06 मेगावाट और सांबा की मानसर झील में 31.9 मेगावाट की क्षमता का आकलन किया गया है। लघु जलविद्युत क्षेत्र में वर्तमान में 35.25 मेगावाट क्षमता की सात परियोजनाएं संचालित हैं, जबकि 3 मेगावाट की एक अन्य परियोजना निर्माण के अंतिम चरण में है। इसके अलावा 2 मेगावाट तक की 76 परियोजनाओं के लिए 118 मेगावाट क्षमता की डीपीआर तथा 2 से 10 मेगावाट श्रेणी की 56 परियोजनाओं के लिए 331 मेगावाट क्षमता की डीपीआर तैयार की गई हैं।
बैठक में पीएम सूर्य घर योजना की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि देशभर में स्वीकृत 15 डीपीआर में से आठ जम्मू-कश्मीर के लिए मंजूर हुई हैं, जिनमें 7.99 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। वहीं, जेकेएडा ने पवन ऊर्जा संसाधनों का आकलन शुरू किया है और बिड्डा तथा इजारा में लगाए गए दो विंड मास्ट का परीक्षण पूरा किया गया है। बिड्डा को बड़े स्तर के विंड फार्म के लिए संरचनात्मक रूप से उपयुक्त पाया गया है। प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी नीति के तहत 2030 तक 500 मेगावाट ग्राउंड-माउंटेड सोलर, 150 मेगावाट बैटरी एनर्जी स्टोरेज और 50 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 2040 तक इन क्षमताओं को क्रमश: 2000, 1200 और 300 मेगावाट तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। बैठक में प्रस्तावित कंप्रेस्ड बायो-गैस नीति पर भी चर्चा हुई। इसके तहत नगर निकायों के गीले कचरे, पशु अपशिष्ट, बागवानी कचरे और कृषि अवशेषों से कंप्रेस्ड बायो-गैस तैयार करने की योजना है। प्रस्तावित रोडमैप के अनुसार 31 मार्च 2030 तक कम से कम छह बड़े सीबीजी संयंत्र चालू करने का लक्ष्य है, जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता 32 टन प्रतिदिन होगी। इससे 700 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

