आदिवासी समाज के लिए एक जनवरी है काला दिन : शिवा

सरायकेला, 01 जनवरी (हि.स.)। नव वर्ष के अवसर पर केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप के नेतत्व में आदिवासी एकता समिति दहिसोत बनहोरा और पंडरा के सदस्यों ने गुरूवार को सरायकेला-खरसांवा पहुंचकर शहीद स्थल में शहीदों पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।

इस अवसर पर शिवा कच्छप ने कहा कि नव वर्ष (एक जनवरी) पूरे आदिवासी समाज के लिए काला दिन की तरह है। उन्‍होंने कहा कि इस दिन को आदिवासी समाज काला दिवस के रूप में मनाता है। उन्‍होंने बताया कि सरायकेला खरसांवा गोलीकांड के कारण आदिवासी समुदाय एक जनवरी को काला दिन के रूप में मनाता है।

उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद उड़ीसा सरकार, सरायकेला-खरसांवा की विरासत को उड़ीसा में शामिल करना चाहती थी। इसी बात को लेकर सरायकेला और खरसांवा के विभिन्न क्षेत्रों के आदिवासी संगठनों की ओर से 1 जनवरी 1948 को खरसांवा हाट मैदान में एक विरोध शांतिसभा और रैली का आयोजन किया गया था। जिसमें हजारों की संख्या के आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए थे। ऐसे में उड़ीसा पुलिस ने मौजूद भीड पर अंधाधूंध गोली चलाई थी जिसमें हमारे हजारों आदिवासी भाई शहीद हुए थे। यही वजह है हम सभी इस दिन को एक काले अध्‍याय के रूप में याद करते ह्रैं।

श्रद्धांजलि देनेवालों में असम के कांग्रेस नेता स्टीफन लकड़ा, केंदीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप, पंडारा के पूर्व मुखिया सुनील तिर्की, राम टाना भगत, पंडरा ग्राम प्रधान लालू खलखो, समाज सेवी सोनू लकड़ा सहित अन्‍य शा‍मिल थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar