धारा 342 को समाप्त कर देने से बहुत हद तक समाप्त होगा धर्मांतरण : होसबाले

फाइल फोटोकार्यक्रम में मौजूद संत

रांची, 12 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सोमवार को प्रवास के दौरान रांची पहुंचे। रांची के हरमू स्थित एक बैंंक्‍वेट हॉल में सामाजिक सद्भाव को लेकर बैठक का आयोजन किया गया, इसमें समाज के विभिन्न संगठन, विभिन्न जाति और समुदायों के सैकडों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर चर्चा करना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था।

बैठक के प्रथम सत्र में समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्यों की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने अपने कार्यों के दौरान सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों को भी साझा किया।

इनमें प्रमुख रूप से धर्मांतरण, घुसपैठ, नशाखोरी, अशिक्षा, अंधविश्वास, परस्पर सहयोग की कमी, बाल-विवाह, लव-जिहाद जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया।

वहीं, द्वितीय सत्र में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय ने समाज के प्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए प्रश्न और विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। धर्मांतरण पर उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। इसमें झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र और दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना राज्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में साजिश के तौर पर चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया और हिंदू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ। होसबाले ने गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास को उन्होंने धर्मांतरण के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित 3-डी समस्या का उल्लेख किया, जिसमें धर्मांतरण, डीजे संस्कृति और शराब शामिल है।

धर्मांतरण की समस्या को कम करने के उपायों पर उन्होंने समाज में परस्पर सहयोग, छुआछूत और जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊंच-नीच की भावना त्यागने और हिंदू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा।

सरकार्यवाह ने जातिगत समस्या पर चर्चा करते हुए कहा कि हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं। किसी भी जाति को नीचा या ऊंचा नहीं समझना चाहिए।

पुरुष-महिला समानता माैजूदा समय की आवश्यकता

उन्होंने महिलाओं-बहनों के सम्मान पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब पुरुष और महिलाएं साथ-साथ कार्य कर रहे हैं, तो उनके बीच असमानता का कोई औचित्य नहीं है।

दत्तात्रेय ने कहा कि आज सोशल मीडिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के कंटेंट से भरा हुआ है। बच्चों को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए बच्चों के साथ संवाद की प्रक्रिया अपनाने पर उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि मंदिर जाने से अहंकार दूर होता है और मन को शांति मिलती है। उन्होंने विभिन्न पर्वों पर बनाए जाने वाले पंडालों में अत्यधिक खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मनोरंजन की प्रवृत्ति से जोड़कर देखने की जरूरत बताई।

वहीं सरकार्यवाह ने स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए ने भारतीय युवाओं से उनके कथन, थिंक लिटिल लेस, एक्टल लिटिल मोर को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने हिंदू समाज के करने योग्ये कार्यों के रूप में जोर देते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबी, अशिक्षा और अभावग्रस्त लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही। उन्होंने पारसी समुदाय का उदाहरण देते हुए मेहनत के बल पर आगे बढ़ने की बात कही और बताया कि आज़ादी के समय पारसी समाज ने सरकार से किसी प्रकार के आरक्षण की मांग नहीं की थी। उन्हों ने दिव्यांग बच्चों को समाज के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों की ओर से गोद लेने का आग्रह किया और समाज के विभिन्न समूहों से ऐसे बच्चों की सहायता करने की अपील की।

बांग्लादेशी घुसपैठ पर जताई चिंता

बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर उन्होंने कहा कि घुसपैठ के माध्यम से लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठाया जाता रहा है। आज बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा पर फेंसिंग एक बड़ी चुनौती है और कई बार हमारे ही लोग घुसपैठियों को शरण देते हैं। सरकार एसआईआर सहित विभिन्न माध्यमों से इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास कर रही है।

बैठक में दत्तात्रेय होसबाले ने हिंदू समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों से अपने-अपने समुदाय के विकास के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने एक-दूसरे के कार्यक्रमों में सहभागिता, परस्पर आदर-सम्मान, कमजोर समुदायों की सहायता और हम सभी हिंदू हैं इस भाव को हमेशा याद रखने की अपील की।

इधर, तीसरे सत्र में दत्तात्रेय होसबोले ने झारखंड के कई संतों के साथ आध्यात्मिक-धार्मिक विषयों पर चर्चा की।

बैठक में धारा 342 पर चर्चा हुई जिसमें धर्मांतरण के बाद जनजाति वर्ग के स्टेटस में कोई बदलाव नहीं आता और धर्मांतरण के बाद ईसाई या मुस्लिम बनने के बाद भी जनजातियों को सुविधाओं का लाभ मिलता रहता है। उन्हाेंने कहा कि यदि इस धारा को समाप्त कर दिया जाए तो धर्मांतरण बहुत हद तक समाप्त हो जाएगा।

इस सत्र में गुरुकुल की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

वहीं, सामाजिक अध्यात्मिक संगठन की बैठक में उन्होंने कहा कि समाज की सामाजिक, आध्यात्मिक संस्थाओं ने सेवा, साहित्य, कला, धार्मिक क्षेत्रों में कार्य किया है। हजारों वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है। ऐसा एक महान लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकारें भी कई कार्यों में योगदान देती रही हैं, लेकिन बहुत सारे अनुकरणीय कार्य परिवार की भी होती है। इसमें अपने बच्चों को संस्कार देना और उन्हें बड़े-बुज़ुर्गों का आदर करना सिखाना शामिल है। होसबाले ने कहा कि समाज की एकता जरूरी है। जंजीर की प्रत्येक कड़ी स्वयं मजबूत रहे और एक कड़ी दूसरे कड़ी से जुड़े रहे, यह जरूरी है। सरकार के समक्ष याचना की स्थिति में हमारे युवा न रहें, ऐसे समाज निर्माण पर बल देना चाहिए। संस्कृत के उपयोग पर भी जोर दिया गया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे