ब्लूवन इंक की प्रस्तुति जयपुर बुकमार्क प्रकाशन के भविष्य

जयपुर, 18 जनवरी (हि.स.)। दक्षिण एशिया का प्रमुख प्रकाशन सम्मेलन ब्लूवन इंक द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के साथ आयोजित हो रहा है। इस आयोजन में वैश्विक प्रकाशन जगत में हो रहे बदलावों पर पूरे दिन सार्थक और उपयोगी संवाद हुए। प्रकाशक, संपादक, एजेंट, अनुवादक, लेखक और प्रकाशन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर आए और नवाचार, अनुबंध, स्व-प्रकाशन, अनुवाद, अकादमिक पब्लिशिंग, वैश्विक कला और एनीमे तथा अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा की।

जयपुर बुकमार्क के बहुप्रतीक्षित चौथे दिन की शुरुआत द फ़्यूचर ऑफ़ बुक्स से हुई। जहां रीइमैजिनिंग नैरेटिव्स सत्र डेल्फ़िन क्लो, जोसेलिन अज़ोरिन-लारा और मायलीस वातेरिन ने स्वाति चोपड़ा के साथ संवाद किया। सत्र की शुरुआत फ़्रेंच इंस्टिट्यूट इन इंडिया के निदेशक के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने आधिकारिक रूप से “फ़्रेंच-इंडियन ईयर ऑफ़ इनोवेशन” की घोषणा की। इसके बाद अधिकारों, नैतिकता और देशों के बीच साहित्यिक रिश्तों में लेखकों और पाठकों के सम्मान के महत्व पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मैट्रियोश्काज़ की प्रस्तुति रही, जो किताब से स्क्रीन तक रूपांतरण पर काम करने वाली टीम है। उन्होंने प्रकाशन और फ़िल्म निर्माण के बीच बदलते संबंधों पर रोशनी डाली। पैनल में एआई के आगमन और कहानी कहने पर उसके संभावित प्रभाव पर भी चर्चा हुई, जिसमें स्टूडियो जिब्ली का उदाहरण दिया गया और कॉपीराइट से जुड़ी चिंताओं पर बात की गई। वक्ताओं ने निष्कर्ष में कहा कि भले ही माध्यम बदलते रहें, कहानी की ताक़त हमेशा बनी रहती है, और आने वाले कलाकारों में निवेश करना ज़रूरी है।

कॉन्ट्रैक्ट्स: रीडिंग द फ़ाइन प्रिंट सत्र में अमृता त्रिपाठी और ध्रुव सिंह ने हेमाली सोढ़ी के साथ बातचीत करते हुए प्रकाशन अनुबंधों को रचनात्मक और क़ानूनी दोनों दृष्टिकोण से समझाया। चर्चा में अनुबंध की शर्तें और अवधि, क्षेत्रीय अधिकार, फ़ॉर्मैट और वारंटी, किसी रचना को पुनः प्रकाशित करने के विशेष अधिकार के रूप में कॉपीराइट, तथा अनुबंध करने वाले पक्षों के बीच संतुलन जैसे विषयों को स्पष्ट किया गया। पैनल ने एआई के दौर में कॉपीराइट से जुड़े नए सवालों पर भी विचार किया, विशेष रूप से मशीनों को प्रशिक्षित करने के लिए सामग्री के उपयोग और अनुवाद अधिकारों से जुड़े क़ानूनी पहलुओं पर। इसके अलावा, अनुवाद और इम्प्रिंट्स के क्षेत्र के अनुभवी और दूरदर्शी विशेषज्ञ अरुणाव सिन्हा और विवेक शानभाग ने उच्च गुणवत्ता वाले अनुवाद के लिए आवश्यक सांस्कृतिक संदर्भों, शब्दावली और दार्शनिक अवधारणाओं पर चर्चा की। पैनल में अनुवाद की दुनिया में मौजूद अंतराल, वितरण, भुगतान और विपणन से जुड़ी चुनौतियों पर भी बात हुई। वक्ताओं ने अगली पीढ़ी के अनुवादकों के लिए उपयुक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश