यमुनानगर, 04 जनवरी (हि.स.)।
यमुनानगर जिले की न्यायिक व्यवस्था पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जिला अदालतों में इस समय कुल 59 हजार 514 मुकदमे विचाराधीन हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जो एक वर्ष से अधिक समय से फैसले की प्रतीक्षा में हैं, जिससे न्याय में देरी की गंभीर स्थिति सामने आ रही है। आंकड़ों के अनुसार लंबित मामलों में 24,441 सिविल और 35,073 आपराधिक प्रकृति के केस शामिल हैं। इनमें से कुल 41,851 मुकदमे ऐसे हैं, जिनकी सुनवाई एक साल से ज्यादा समय से चल रही है। सिविल मामलों में स्थिति और भी जटिल दिखाई देती है, जहां करीब 17 हजार से अधिक केस एक वर्ष की सीमा पार कर चुके हैं। कई विवाद पांच से दस साल और कुछ तो एक दशक से भी ज्यादा समय से अदालतों में लंबित हैं।
आपराधिक मामलों का हाल भी कम चिंताजनक नहीं है। जिला अदालतों में लगभग 25 हजार आपराधिक केस ऐसे हैं, जो एक साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं। इनमें हजारों मामले तीन से पांच साल और कई पांच से दस साल की अवधि पार कर चुके हैं। लंबे समय तक चलने वाले आपराधिक मुकदमों का असर न केवल पीड़ितों पर, बल्कि गवाहों और आरोपियों पर भी पड़ता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामलों की बढ़ती संख्या के अनुपात में न्यायिक संसाधनों का विस्तार नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि जजों की संख्या बढ़ाने, डिजिटल तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणालियों को मजबूत किए बिना लंबित मामलों में कमी लाना मुश्किल है।
दिसंबर 2025 के दौरान अदालतों में कार्यभार का दबाव साफ नजर आया। इस अवधि में जिला न्यायालयों में 2,321 नए मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 2,213 मामलों का निपटारा किया गया। हालांकि निपटारे की गति नए मामलों के करीब रही, लेकिन पहले से लंबित मुकदमों की भारी संख्या न्यायिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार



