जशपुर: केशलापाठ पहाड़ पर आस्था का महासंगम, तमता मेले में शामिल हुए कलेक्टर रोहित व्यास

केशलापाठ पहाड़ तमता मेला

जशपुर, 04 जनवरी (हि.स.)। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम तमता स्थित केशलापाठ पहाड़ पर आयोजित तीन दिवसीय परंपरागत केशलापाठ मेला आस्था और विश्वास का विशाल केंद्र बना रहा। इस अवसर पर जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास मेले में शामिल हुए और 300 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ की चोटी पर स्थित देव स्थल में विधिवत दर्शन कर जिलेवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

हर वर्ष छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व छेरछेरा के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक मेले में दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कलेक्टर ने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन द्वारा केशलापाठ देव स्थल पर आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मूलभूत अधोसंरचना का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां सामुदायिक शौचालय की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा देव स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क निर्माण कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही विधायक द्वारा घोषित मंच निर्माण कार्य को भी अगले वर्ष तक पूर्ण करने की बात कही गई है। वन विभाग के समन्वय से परिसर के सौंदर्यीकरण हेतु कार्ययोजना तैयार कर उसे चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा।

कलेक्टर श्री व्यास ने मेले में आए श्रद्धालुओं और व्यवसाइयों से शांति, सौहार्द और व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग का आग्रह किया। मेले के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने देव स्थल में दर्शन कर अपने परिवार, गांव और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु पहले देव स्थल में पूजा-अर्चना कर दर्शन करते हैं, इसके बाद मेले का आनंद उठाते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा कई दशकों से निरंतर चली आ रही है। पौष पूर्णिमा के अवसर पर छेरछेरा पर्व के दूसरे दिन यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। स्थानीय मान्यता है कि आदिकाल में पांडव भीम ने यहां गांववासियों को असुरों के आतंक से मुक्त कराने के लिए बकासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिसके कारण केशलापाठ पहाड़ विशेष पूज्य देव स्थल के रूप में प्रतिष्ठित है। देव स्थल के समीप स्थित प्राचीन कुंड में वर्षभर जल भरा रहता है, जहां स्नान कर श्रद्धालु स्वयं को शुद्ध करते हैं और तत्पश्चात मंदिर में दर्शन करते हैं। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने और पूर्ण होने पर पुनः आकर नारियल अर्पित करने की परंपरा है। मेले के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, आयोजन समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह