कोरिया: जन्म-मृत्यु पंजीयन को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए डीएलसीसी की बैठक संपन्न

अंबिकापुर/कोरिया, 01 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (डीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। यह समिति छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार गठित की गई है।

बैठक मे अध्यक्ष कलेक्टर चन्दन त्रिपाठी ने जिले के समस्त संबंधित विभागीय अधिकारियों को जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु की घटना का समय पर पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में ऑनलाइन पंजीयन की वर्तमान स्थिति, लक्ष्य के अनुरूप प्रगति, मृत्यु के कारणों से संबंधित चिकित्सीय प्रमाण पत्र (एससीसीडी), मासिक प्रसव एवं जन्म पंजीयन की स्थिति, तथा प्रचार-प्रसार हेतु पंजीयन इकाइयों में पोस्टर वितरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही, फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की पहचान, जांच एवं रोकथाम को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए।

कलेक्टर ने जन्म-मृत्यु पंजीयन से संबंधित विलंबित पंजीयन के नियमों की जानकारी देते हुए अधिकारियों की शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जिला चिकित्सालय सहित सभी शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों व घर में घटित होने वाली जन्म एवं मृत्यु की प्रत्येक घटना का संबंधित पंजीयन इकाई द्वारा तत्काल पंजीयन हो जाये।

राज्य में जन्म-मृत्यु पंजीयन की स्थिति को सुदृढ़ करने एवं शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत सचिवों तथा नगरीय क्षेत्रों में संबंधित निकायों के रजिस्ट्रार को अपने अधिकार क्षेत्र में घटित समस्त घटनाओं को अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने सर्वसम्मति से जिले में जन्म-मृत्यु पंजीयन को और अधिक प्रभावी बनाने का संकल्प लिया।

इस बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन, अनुभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला शिक्षा अधिकारी, पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, सहायक संचालक, जनसंपर्क तथा नगर पालिका परिषद के अधिकारी, जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह