मतदाता सूची से नाम काटने के आरोप पर कल्याणी में हंगामा, एसडीओ कार्यालय पहुंचे भाजपा विधायक को रोका गया

कोलकाता, 14 जनवरी (हि.स.)। मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोप को लेकर नदिया जिले के कल्याणी में बुधवार को भारी हंगामा हुआ। फॉर्म-7 जमा करने और अनुमंडल शासक (एसडीओ) कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे भाजपा विधायक अंबिका राय को तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान एसडीओ कार्यालय के बाहर तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

जानकारी के अनुसार, भाजपा विधायक अंबिका राय अपने समर्थकों के साथ एसडीओ कार्यालय पहुंचे थे। उनके कार्यालय परिसर में प्रवेश करते ही तृणमूल कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और ‘गो बैक’ के नारे लगाए। जब विधायक गाड़ी से उतरकर कार्यालय के भीतर जाने लगे, तो हालात और बिगड़ गए। पुलिस द्वारा रोकने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, इसी दौरान भाजपा विधायक भी जमीन पर गिर पड़े। बाद में राज्य पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर विधायक को एसडीओ कार्यालय के अंदर पहुंचाया।

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक मतदाताओं के नाम कटवाने के उद्देश्य से एसडीओ कार्यालय पहुंचे थे। तृणमूल का दावा है कि विधायक हाथ में फाइल लेकर आए थे और फॉर्म-7 जमा करना चाहते थे। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है। तृणमूल का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के जरिए उनके समर्थकों के नाम काटने की कोशिश की जा रही है। इसी कारण तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भी एसडीओ कार्यालय में प्रवेश की मांग की।

स्थिति को देखते हुए एसडीओ कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

वहीं, भाजपा विधायक अंबिका राय ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के नेतृत्व में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को बाधित करने के लिए तृणमूल कांग्रेस जानबूझकर हंगामा कर रही है। उन्होंने एसडीओ अभिजीत सामंत से मुलाकात के दौरान कार्यालय परिसर में हुई घटना की कड़ी निंदा की।

दूसरी ओर, युवा तृणमूल नेता सायन दत्त ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक पिछले कुछ दिनों से इलाके में घूमकर लगभग दो हजार 500 मतदाताओं के नाम कटवा चुके हैं और उनका लक्ष्य आठ हजार नाम हटाने का है।

तृणमूल का कहना है कि जिन मतदाताओं के समर्थन से विधायक चुने गए, उन्हीं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी का नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं है, तो क्या इसका मतलब यह है कि वह मतदाता नहीं है।

घटना के बाद से कल्याणी में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सियासी तनाव और गहरा गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर