हिंदू शरणार्थी होंगे सबसे अधिक प्रभावित, पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर सीपीआई माकपा नेता कांति गांगुली की चेतावनी

कोलकाता, 01 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर वरिष्ठ माकपा नेता कांति गांगुली ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से सबसे अधिक वे हिंदू प्रभावित होंगे, जो बांग्लादेश से पलायन कर राज्य में बस चुके हैं। गांगुली ने दावा किया कि सुंदरबन क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे हिंदू परिवार रहते हैं और दस्तावेज़ सत्यापन की इस कवायद में इन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पूर्व मंत्री कांति गांगुली ने कहा कि वह सैद्धांतिक रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इतनी बड़ी और जटिल प्रक्रिया को केवल दो से तीन महीने में पूरा करना व्यावहारिक नहीं है। उनके अनुसार, देश की विशाल आबादी को देखते हुए मतदाता सूची को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए चुनाव आयोग को ज्यादा समय देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पर्याप्त समय मिलता तो यह प्रक्रिया और भी पारदर्शी और त्रुटिरहित हो सकती थी।

गांगुली ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को इस अभ्यास के लिए पहले से स्पष्ट और विस्तृत दिशा-निर्देश तय करने चाहिए थे। ऐसा न होने के कारण आम मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी और कई तरह की अटकलें और गलत धारणाएं फैल गईं। उनके मुताबिक, बेहतर तैयारी और साफ दिशानिर्देश होते तो इन स्थितियों से बचा जा सकता था।

उन्होंने यह भी कहा कि इस विशेष गहन पुनरीक्षण का सबसे ज्यादा लाभ उन राजनीतिक दलों को मिलेगा, जिनका संगठन मजबूत है। आगामी विधानसभा चुनावों पर इसका असर दिख सकता है। हालांकि, गांगुली ने साफ तौर पर कहा कि मौजूदा हालात में वामपंथी दलों को इससे कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। उनका मानना है कि जब तक कम्युनिस्ट पार्टियां जनता का भरोसा दोबारा हासिल नहीं करतीं, तब तक चुनावी प्रदर्शन में सुधार मुश्किल है और एसआईआर से भी इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।

एसआईआर के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कांति गांगुली ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध का आधार ठोस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल विरोध के लिए विरोध उचित नहीं है। विपक्षी दलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस प्रक्रिया में आम मतदाताओं को किन वास्तविक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और वे किन खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं।

गांगुली ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को विपक्षी दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहना चाहिए और पूरी सटीकता के साथ इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए। उन्होंने आश्चर्य जताया कि उन्हें स्वयं दस्तावेज़ सत्यापन की सुनवाई के लिए बुलाया गया है, जबकि उनका नाम 2002 की मतदाता सूची में भी दर्ज था, उस समय वह मंत्री थे। उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार को सुनवाई में उपस्थित होकर चुनाव आयोग को सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर