कानपुर सेंट्रल–नौबस्ता सेक्शन में मेट्रो ट्रैक व थर्ड रेल का कार्य तेज : सुशील कुमार

कानपुर, 16 जनवरी (हि.स.)। कॉरिडोर-1 बैलेंस सेक्शन (कानपुर सेंट्रल - नौबस्ता) के अंतर्गत, कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैम्प के बीच अंडरग्राउंड हिस्से में ट्रैक निर्माण और थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। कानपुर मेट्रो की टीम तीसरे चरण में कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक यात्री सेवा के विस्तार के लिए पूरी प्रतिबद्धता से तैयारी कर रही है। सिग्नलिंग, टेलिकॉम, इलेक्ट्रिकल, ट्रैक्शन आदि सभी विभागों के सिस्टम इंस्टॉलेशन संबंधी कार्य सुंयोजित ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। यह बातें शुक्रवार को यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कही।

कानपुर मेट्रो कॉरिडोर -1 (आईआईटी - नौबस्ता) के शेष भाग (कानपुर सेंट्रल - नौबस्ता) के अंतर्गत लगभग 5.3 किमी लंबे एलिवेटेड सेक्शन (बारादेवी से नौबस्ता) में थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का कार्य पूरा करने के बाद अब कानपुर सेंट्रल से स्वदेशी कॉटन मिल रैंप तक लगभग तीन किमी लंबे अंडरग्राउंड स्ट्रेच में भी थर्ड रेल सिस्टम इंस्टॉलेशन का कार्य आरंभ कर दिया गया है। थर्ड रेल सिस्टम के अंतर्गत सबसे पहले ब्रैकेट्स लगाने के कार्य की शुरूआत की गई है। वर्तमान में यह कार्य इस स्ट्रेच के ‘अप-लाइन‘ टनल में किया जा रहा है।

विदित हो कि उक्त अंडरग्राउंड स्ट्रेच में ट्रैक निर्माण का कार्य भी पहले ही तेजी से आगे बढ़ रहा है। समय की बचत के लिए ट्रैक निर्माण के साथ ही थर्ड रेल इंस्टॉलेशन का कार्य भी आरंभ कर दिया गया है। ’अप-लाइन’ टनल में ट्रैक और थर्ड रेल इंस्टॉलेशन कार्य पूरा होने पर कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो ट्रेनों की टेस्टिंग प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।

थर्ड रेल प्रणाली में पारंपरिक तौर पर प्रयोग होने वाली ओएचई (ओवर हेड इक्युपमेंट) प्रणाली की जगह पर ट्रैक के समानांतर बिछी हुई थर्ड रेल का प्रयोग किया जाता है। 750 वोल्ट डीसी करंट पर चलने वाली कानपुर मेट्रो ट्रेनें परिचालन के लिए इसी थर्ड रेल का प्रयोग करतीं हैं।

थर्ड रेल प्रणाली के अंतर्गत ट्रेनों के परिचालन के लिए बिजली की सप्लाई ट्रैक के समानांतर बिछी हुई थर्ड रेल से मिलती है साथ ही, यह सप्लाई डायरेक्ट करंट (डीसी) होती है। थर्ड रेल ट्रैक्शन सिस्टम का मेंटेनेंस कम होता है क्योंकि इसमें पतंगबाज़ी वगैरह की वजह से बिजली की सप्लाई ट्रिप या बाधित होने की आशंका नहीं होती क्योंकि थर्ड रेल सिस्टम में बिजली के तारों का कोई सेटअप बाहरी तौर पर दिखाई नहीं देता, इस वजह से यह सिस्टम शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुंदर बनाए रखने में भी मददगार होता है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप