महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में 52 प्रतिशत वोटिंग, इचलकंरजी में सर्वाधिक 70 फीसदी मतदान

- मुंबई में 53 प्रतिशत और सबसे कम मीरा-भायंदर में 48 फीसदी मतदान

मुंबई, 17 जनवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव में कुल 54.77 फीसदी मतदान हुआ है। इनमें इचलकंरजी में सर्वाधिक 70 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि सबसे कम 48.64 फीसदी वोटिंग मीरा-भायंदर में हुई। इसी तरह मुंबई में 52.94 प्रतिशत वोट पड़े। यह जानकारी शनिवार को राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी आकड़ों से मिली।

राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव के लिए वोटिंग 15 जनवरी को हुई थी। उसदिन चुनाव आयोग ने वोटिंग के परसेंटेज का अंदाज़ा लगाया था। आज फाइनल परसेंटेज के आंकड़े दिए गए हैं। राज्य में 3 करोड़ 48 लाख 79 हज़ार 337 वोटर थे। इसमें से 1 करोड़ 91 लाख 3 हज़ार 653 वोटर्स ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। मुंबई में कुल 1 करोड़ 3 लाख 44 हज़ार 315 वोटर्स थे। जिसमें से 54 लाख 76 हज़ार 11 वोटर्स ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। इसमें 29 लाख 23 हज़ार 412 पुरुष, 25 लाख 52 हज़ार 346 महिला और 253 अन्य वोटर्स शामिल हैं। राज्य की नौ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन्स में 60 परसेंट से ज़्यादा वोटिंग हुई। इनमें इचलकरंजी, जालना, मालेगांव, अहिल्यानगर, कोल्हापुर, सांगली-मिराज-कुपवाड़, नांदेड़-वाघला, लातूर, परभणी शामिल हैं।

अन्य नगर पालिकाओं में मतदाता मतदान- ठाणे - 55.59 प्रतिशत, कल्याण-डोंबिवली - 50.32 प्रतिशत, नवी मुंबई - 57.15 प्रतिशत, वसई-विरार - 57.12 प्रतिशत, उल्हासनगर - 52.10 प्रतिशत, भिवंडी-निजामपुर - 53.43 प्रतिशत, पनवेल -55.67 प्रतिशत, नासिक - 56.67 प्रतिशत, धुले - 56.73 प्रतिशत, जलगांव - 53.60 प्रतिशत, पुणे - 52.42 प्रतिशत, पिंपरी-चिंचवाड़ - 57.71 प्रतिशत, सोलापुर - 53.02 प्रतिशत, छत्रपति संभाजीनगर - 59.82 प्रतिशत, अमरावती - 54.10 प्रतिशत, अकोला - 55.61 प्रतिशत, नागपुर - 51.38 प्रतिशत, चंद्रपुर - 56.89 प्रतिशत रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार वोटरों को वोट देने जाना था लेकिन यह साफ़ नहीं था कि पोलिंग स्टेशन कहां है। एक वार्ड में परिवार के कुछ सदस्यों के वोटर वहीं के पोलिंग स्टेशन पर थे, जबकि आधे परिवार का पोलिंग स्टेशन दूसरे वार्ड में था, यह सारा कन्फ्यूजन चुनाव सिस्टम ने पैदा किया था। ज़्यादातर जगहों पर वोटरों को ऐसी परेशानी हुई। एक वार्ड में रहते हुए भी नागरिकों को दूसरे वार्ड में पोलिंग स्टेशन ढूंढने के लिए संबंधित जगह पर जाना पड़ा, क्योंकि पोलिंग स्टेशन भी बहुत दूर था। इस कन्फ्यूजन की वजह से नागरिकों ने इस प्रोसेस पर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया, यह सवाल उठाते हुए कि क्या यह वोटिंग थी या चुनाव आयोग हमारे सब्र का इम्तिहान ले रहा था। लगभग सभी जगहों पर ऐसा कन्फ्यूजन का माहौल था। युवाओं से लेकर बुज़ुर्गों तक, इससे बहुत ज़्यादा बेवजह परेशानी हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव