महाभारत समागम के दूसरे दिन हुई पांचाली, दुःशासन वध, उर्वशी और शिखंडी की प्रस्तुति

- श्रीलंका और पूर्वोत्तर राज्य के कलाकारों ने अपनी शैली में प्रस्तुत किया महाभारत

भोपाल, 17 जनवरी (हि.स.)। देश में पहली बार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित हो रहे महाभारत समागम के दूसरे दिन शनिवार देर शाम पांचाली, दुःशासन वध, उर्वशी और शिखंडी की प्रस्तुति हुई। श्रीलंका और पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के कलाकारों ने अपनी अपनी शैलियों में महाभारत के प्रसंग को नृत्य-नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत किया।

वीर भारत न्‍यास द्वारा आयोजित सभ्यताओं के संघर्ष एवं औदार्य की महागाथा पर केंद्रित महाभारत समागम में शनिवार को बहिरंग के मंच पर अरियारत्ने कालूराच्चि निर्देशित एके फोक आर्ट रिसर्च सेंटर कोलंबो, श्रीलंबा द्वारा संगीत नाट्य प्रस्तुति पांचाली की प्रस्तुति दी गयी। इसके पहले पूर्वरंग में कल्याण कृष्ण नायर द्वारा निर्देशित कथकली नृत्य शैली में दुःशासन वध, मणिपुर से आये टिकेन सिंह निर्देशित नृत्य नाट्य उर्वशी तथा दिल्ली के हिमांशु श्रीवास्तव के निर्देशन में तैयार हुई शिखंडी का मंचन किया गया। कार्यक्रम के पूर्व वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी द्वारा कलाकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

पांचाली में दर्शकों ने देखा वीरता और भावनाओं से भरा प्रसंग

बहिरंग मंच पर संगीत-नाट्य प्रस्तुति पांचाली' के अंतर्गत महाभारत का एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक प्रसंग मंचित किया गया। कथा की शुरुआत बदरिकाश्रम के शांत और रमणीय वातावरण से होती है, जहाँ पांडवों की महारानी द्रौपदी प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले रही हैं। तभी एक अद्भुत पुष्प उनके पास बहकर आता है। उस फूल को देखकर द्रौपदी और अधिक पुष्प पाने की इच्छा प्रकट करती हैं और इस कार्य के लिए भीम को भेजती हैं।

द्रौपदी की इच्छा पूरी करने निकले भीम घने वन में प्रवेश करते हैं, जहां उनके भारी कदमों से भगवान हनुमान की निद्रा भंग हो जाती है। हनुमान पहले भीम का मार्ग रोकते हैं और अपनी अपार शक्ति का परिचय देते हैं। बार-बार प्रयास के बावजूद जब भीम असफल होते हैं, तब वे हनुमान की महानता स्वीकार करते हैं। इसके बाद हनुमान स्वयं को भीम का भाई बताते हैं और भविष्य में अर्जुन के रथ पर विराजमान होकर उनका साथ देने का वचन देते हैं। यह दृश्य दर्शकों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।

आगे की यात्रा में भीम एक नदी और राक्षसों से भरे उपवन तक पहुँचते हैं। अपने धर्मयुक्त क्रोध और वीरता से वे राक्षसों का संहार करते हैं। इससे प्रसन्न होकर कुबेर उन्हें पुष्प तोड़ने की अनुमति देते हैं। बाद में युधिष्ठिर, द्रौपदी और अन्य पांडव वहाँ पहुँचते हैं और भीम की विजय के साक्षी बनते हैं। कुछ समय सभी उपवन में शांति और आनंद का अनुभव करते हैं।

इसी दौरान एक दिव्य वाणी उन्हें बदरी जाने की याद दिलाती है, जहाँ अर्जुन उनसे मिलने वाले हैं। बदरिकाश्रम में अर्जुन का आगमन इंद्र के सारथी मातलि के साथ होता है। अर्जुन का युधिष्ठिर और भीम से भावनात्मक पुनर्मिलन पारिवारिक प्रेम और भ्रातृत्व के गहरे संबंधों को दर्शाता है। अर्जुन इंद्रलोक में प्राप्त दिव्य अस्त्र-शस्त्र और ज्ञान का भी वर्णन करते हैं। पुनर्मिलन की खुशी में सभी उत्सव मनाते हैं और फिर काम्यक वन की ओर प्रस्थान करते हैं। यह प्रसंग वीरता, दिव्य मार्गदर्शन, प्रकृति के सम्मान, पारिवारिक एकता और पांडवों की भावी युद्ध एवं आध्यात्मिक तैयारी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।

अंतरंग मंच पर 'शिखंडी की प्रभावशाली प्रस्तुति

निर्देशक हिमांशु श्रीवास्तव के निर्देशन में अंतरंग मंच पर नाट्य प्रस्तुति शिखंडी का सशक्त मंचन किया गया। यह नाटक महाभारत के उस पात्र पर केंद्रित है, जिसे लंबे समय तक समाज और इतिहास ने हाशिये पर रखा। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में खड़ा शिखंडी केवल युद्ध नहीं, बल्कि अपनी पहचान और स्वीकृति की आंतरिक लडाई भी लड़ता है। नाटक लैंगिक पहचान, मानवीय गरिमा और सामाजिक स्वीकार्यता जैसे समकालीन सवालों को प्रभावी ढंग से उठाता है। 2017 से अब तक इसके 75 से अधिक सफल मंचन हो चुके हैं और देश-विदेश में इसे सराहना मिली है।

मणिपुरी नृत्य नाटिका 'उर्वशी' ने दिया अहंकार पर गहरा संदेश

निर्देशक टिकेन सिंह, मणिपुर के निर्देशन में प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट लेबोरेटरी, इम्फाल द्वारा प्रस्तुत मणिपुरी नृत्य नाटिका 'उर्वशी गी नपाल (उर्वशी का अहंकार)' दर्शकों के लिए एक भावपूर्ण अनुभव रही। महाभारत के आदि पर्व पर आधारित यह प्रस्तुति अहंकार के दुष्परिणामों को नृत्य और संगीत के माध्यम से उजागर करती है। कथा नर-नारायण की तपस्या, अप्सरा उर्वशी की उत्पत्ति, उसकी श्रेष्ठता से उपजे अहंकार और महर्षि दुर्वासा के शाप तक पहुंचती है। नाटिका मणिपुरी नृत्य की कोमलता और आध्यात्मिकता के साथ यह संदेश देती है कि विनम्रता ही सच्चा सौंदर्य है।

दर्शकों को कथकली नृत्य नाटिका 'दुशासन वध' ने बांधा

पूर्व रंग में द इंटरनेशनल सेंटर फॉर कथकली, नई दिल्ली द्वारा प्रस्तुत और कल्याण कृष्ण नायर के निर्देशन में मंचित 'दुशासन वधा एक प्रभावशाली कथकली नृत्य नाटिका रही। महाभारत पर आधारित इस प्रस्तुति में धर्म, अधर्म और न्याय के संघर्ष को सशक्त रूप में दिखाया गया। प्रथम खंड में अर्जुन का मोह, श्रीकृष्ण द्वारा गीता उपदेश और विराट रूप दर्शन का भावपूर्ण चित्रण किया गया। द्वितीय खंड में भीम और दुशासन के भीषण युद्ध को शक्तिशाली मुद्राओं और नेत्राभिनय से प्रस्तुत किया गया। अंत में दुशासन वध के साथ द्रौपदी के अपमान का प्रतिशोध पूर्ण होता है।

पीटर ब्रुक की फि ल्म से अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का शुभारंभ

महाभारत समागम अंतर्गत सभ्यताओं के संघर्ष पर एकाग्र अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का शुभारंभ वीर भारत न्यास के परामर्शी राहूल रस्तोगी द्वारा किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि महाभारत समागम अंतर्गत आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह सभ्यताओं के संघर्ष, संवाद और औदार्य को वैश्विक दृष्टि से समझने का सशक्त माध्यम है। सिनेमा के माध्यम से मानवीय मूल्यों और ऐतिहासिक चेतना को जोडने का यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। समारोह में दुनिया जाने माने रंगमंच निर्देशक पीटर बुक की चर्चित फिल्म द महाभारत का प्रदर्शन किया गया। फिल्म देखने के लिए भारी संख्या में छात्र-छात्राओं सहित युवा पहुँचे थे।

रविवार को होगी उरुभंगम, मोहे पिया और नेत्रट नृत्य नाट्य प्रस्तुतियां

महाभारत समागम के अंतर्गत रविवार, 18 जनवरी को पूर्वरंग सत्र में सायं 5:00 बजे सराईकेला छाऊ नृत्य शैली में आधारित 'उरुभंगम्' का मंचन होगा, जिसका निर्देशन पद्मश्री राजातेंदू रथ द्वारा किया गया है। यह प्रस्तुति रजतेन्दु कला निकेतन, सराईकेला की ओर से होगी। अंतरंग सत्र में सायं 6:00 बजे संस्कृत नाटक पर आधारित मध्यम व्यायोग 'मोहे पिया' प्रस्तुत किया जायेगा, जिसके निर्देशक वामन केन्द्रे हैं। बहिरंग सत्र में सायं 7:30 बजे लोकछंदा, नई दिल्ली द्वारा नृत्य नाटिका 'नेत्रट' का मंचन किया जाएगा। जिसका निर्देशन मैत्रेयी पहाड़ी द्वारा किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर