मप्र के सेंधवा में नाबार्ड बैंक के जुड़े लोन धोखाधड़ी मामले में तायल बंधुओं के ठिकानों पर सीबीआई का छापा
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- Jan 14, 2026
बड़वानी, 14 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को छापामार कार्रवाई की है। सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने पुलिस बल के साथ शहर के तायल बंधुओं के छह ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान घरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई नाबार्ड बैंक भोपाल से जुड़े 13 करोड़ रुपये के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में की गई है, जिसमें पहले से ही एफआईआर दर्ज है।
सीबीआई की 16 अधिकारियों की टीम ने सेंधवा में जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित उद्योगपति अशोक तायल के निवास सहित निमाड़ एग्रो पार्क और उससे जुड़े लोगों के परिसरों पर कार्रवाई शुरू की है। जांच के दायरे में निमाड़ एग्रो पार्क के मालिक निकुंज तायल और उनके पिता गिरधारी तायल भी शामिल हैं। सीबीआई की टीम दोनों को लेकर सेंधवा स्थित निमाड़ एग्रो पार्क के कार्यालय पहुंची, जहां दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसके अलावा सीबीआई टीम ने रामकटोरा क्षेत्र में जोशी बंधुओं के घर पर भी दबिश दी है।
सीबीआई की पड़ताल जोशी बंधुओं से जुड़े गुजरात स्थित ठिकानों और तायल बंधुओं के सेंधवा के पास स्थित जामली फूड पार्क से जुड़े लेन-देन पर केंद्रित है। आशंका है कि बैंकों से लिए गए लोन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य कार्यों में किया गया, जिससे बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। जांच टीम या पुलिस ने इस कार्रवाई को लेकर मीडिया के साथ कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। सीबीआई ने मीडिया से बातचीत में केवल इतना कहा है कि मामला जांच के अधीन है और सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
यह पूरा मामला नाबार्ड बैंक भोपाल से संबंधित करीब 13 करोड़ रुपये के कथित लोन घोटाले से जुड़ा है। कोलकाता स्थित सीबीआई इकाई ने सेंधवा के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल तायल बंधुओं के खिलाफ इस संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई की ओर से 8 जनवरी को दर्ज एफआईआर के अनुसार, निमाड़ एग्रो पार्क के संचालक अर्पित राजेंद्र कुमार तायल, निकुंज गिरधारीलाल तायल, अशोक बिहारीलाल तायल और अंकित गिरधारीलाल तायल सहित कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और दस्तावेजों की जालसाजी के गंभीर आरोप हैं। जांच में यह सामने आया है कि वर्ष 2019 में आरोपितों ने नाबार्ड की फूड प्रोसेसिंग फंड योजना के तहत सेंधवा के पास जामली गांव में एक कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना के लिए 13 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इस परियोजना की कुल लागत 31 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी, जिसमें केंद्र सरकार के फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय की ओर से 10 करोड़ रुपये का अनुदान भी स्वीकृत हुआ था।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि आरोपितों ने परियोजना पर खर्च करने के बजाय फर्जी समझौतों के जरिए ऋण की राशि को अन्य कंपनियों और खातों में स्थानांतरित कर दिया। उन्होंने समय-समय पर परियोजना की समय-सीमा बढ़वाकर बैंक अधिकारियों को गुमराह भी किया। सितंबर 2024 में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया। इसके बाद ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई को जांच के लिए पत्र लिखा गया और अब इस मामले में सेंधवा में छापामार कार्रवाई की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर



