मुख्यमंत्री सुक्खू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांगी हिमाचल के लिए मांगी अतिरिक्त मदद

शिमला, 15 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति और राज्य की आर्थिक मजबूती से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि राज्य सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच विकास कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने हिमाचल की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग को एक ज्ञापन और एक अतिरिक्त ज्ञापन सौंपा है, जिसमें हिमाचल की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मांगें रखी गई हैं।

उन्होंने आग्रह किया कि राजस्व घाटा अनुदान को कम से कम 10,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय किया जाए। साथ ही 16वें वित्त आयोग के अवार्ड अवधि के दौरान राज्यों के राजस्व और व्यय का आकलन यथार्थवादी तरीके से किए जाने पर जोर दिया, ताकि पहाड़ी राज्यों की वास्तविक जरूरतें सामने आ सकें।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से ‘ग्रीन फंड’ बनाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इस फंड में हर साल 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान होना चाहिए। उनका कहना था कि पर्वतीय राज्य देश की हरित सीमाएं हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में इनकी भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने होरिजेंटल डिवोल्यूशन के लिए राज्य द्वारा सुझाए गए संशोधित फार्मूले का भी उल्लेख किया और इसमें वनों और वन आधारित पारिस्थितिकी को प्रमुख मानदंड के रूप में शामिल करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाच्छादित और शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों को भी सघन और मध्यम सघन वनों के साथ जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि ये क्षेत्र प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व को दर्शाते हैं।

आपदा प्रबंधन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने 15वें वित्त आयोग द्वारा तैयार आपदा जोखिम सूचकांक को दोबारा परिभाषित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य हिस्सों से नहीं की जा सकती। बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद राज्य को पर्याप्त आपदा राहत संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग आपदा जोखिम सूचकांक और अलग आवंटन की मांग रखी।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान में पिछले कुछ वर्षों में आई भारी कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इससे राज्य की वित्तीय क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा