मंत्री गणेश जोशी ने वरिष्ठ पेंशनर्स को किया सम्मानित

देहरादून, 05 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि संगठन का षष्ठीपूर्ति (हीरक जयंती वर्ष) इस बात का प्रतीक है कि आयु का पड़ाव संकल्पों को कमजोर नहीं करता, बल्कि अनुभव की यह पूंजी संगठन को और अधिक सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स का राज्य निर्माण में भी अहम भूमिका रही है।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी साेमवार काे देहरादून के धर्मपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के छठे प्रान्तीय त्रैवार्षिक महाधिवेशन काे संबाेधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने वरिष्ठ पेंशनर्स को सम्मानित भी किया।

महाधिवेशन मेे कैबिनेट मंत्री जोशी ने कहा कि गौरव का विषय है कि सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन अपने अस्तित्व के 60 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर रहा है। जोशी ने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का अंत नहीं, बल्कि समाज के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत होती है। यह महाधिवेशन केवल आपसी संवाद का मंच नहीं, बल्कि एकता और संगठनात्मक मजबूती का उद्घोष है।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के पदाधिकारियों ने बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र पेंशनरों के हितों और सम्मान की रक्षा की मांग की। उन्होंने कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जुड़ी गोल्डन कार्ड एवं आयुष्मान योजना की विसंगतियों को दूर कर उन्हें और अधिक सरल एवं सुगम बनाने, सरकारी कार्यालयों में पेंशनरों के कार्यों को प्राथमिकता देने तथा नीति निर्धारण में उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाने सहित 14 सूत्रीय मांग पत्र कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को सौंपा।

इस पर कैबिनेट मंत्री जोशी ने संगठन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाया जाएगा तथा उनके समाधान के लिए राज्य सरकार स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह कृषाली, प्रदेश संरक्षक आरएस परिहार, प्रदेश कोषाध्यक्ष एमएस गुसाईं, उपाध्यक्ष कुसुमलता शर्मा, केडी शर्मा, गुलशन कुमार, सरदार रोशन सिंह, चंद्र प्रकाश, प्रदेश सचिव जगदीश प्रसाद रतूड़ी, मोहन सिंह रावत, हृदयराम सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स और अन्य लाेग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल