अंबिकापुर: ज्ञान, राष्ट्रप्रेम और कर्मयोग के प्रतीक स्वामी विवेकानन्द को राष्ट्रीय युवा दिवस पर किया गया स्मरण

राष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रमराष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रम

अंबिकापुर, 12 जनवरी (हि.स.)। बालक नरेन्द्रनाथ से स्वामी विवेकानन्द बनने की यात्रा भारतीय ज्ञान, आध्यात्म और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम है। भारतीय ज्ञान के दूत, दैवीय वक्ता, ज्ञान के आनंद, राष्ट्रप्रेमी संत और योद्धा संन्यासी जैसे विशेषण भी स्वामी विवेकानन्द के विराट व्यक्तित्व के सामने छोटे पड़ जाते हैं। ये विचार राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानन्द की 163वीं जयंती पर श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किए।

राष्ट्रीय सेवा योजना एवं स्वीप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि शिकागो धर्म संसद को संबोधित करने के बाद भारत लौटे स्वामी विवेकानन्द केवल विद्वान नहीं रहे, बल्कि विद्यावान बनकर भारत की आत्मा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उनके “बहनों और भाइयों” के संबोधन ने वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भगवद्गीता के सिद्धांतों को आध्यात्मिक कलेवर में प्रस्तुत कर जीवन दर्शन के रूप में समाज को दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती, स्वामी विवेकानन्द और श्री साईनाथ के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने बैच लगाकर अतिथियों का स्वागत किया और प्रेरणागीत प्रस्तुत किया। स्वीप नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जीवन भले ही मात्र 39 वर्षों का रहा, लेकिन उनके विचार और कार्य मानवता के लिए अमर संदेश हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के जीवन में खेतड़ी के महाराजा अजीत सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिकागो यात्रा के लिए आर्थिक सहायता, विवेकानन्द नाम और पगड़ी का उपहार उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। साथ ही अल्लसिंगा पेरूमल और रामनाद के राजा भास्कर सेतुपति के सहयोग को भी उन्होंने स्मरण किया। डॉ. तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु और शिष्य एक-दूसरे की पहचान बन जाएं, यह दुर्लभ है और स्वामी रामकृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानन्द इसका श्रेष्ठ उदाहरण हैं।

एनईपी के नोडल अधिकारी डॉ. रवींद्र नाथ शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिकता को वैश्विक मंच प्रदान किया। उन्होंने भारतीय विरासत, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन से विश्व को परिचित कराया। उन्होंने रोम्यां रोलां के संस्मरणों के माध्यम से स्वामी विवेकानन्द के प्रभावशाली व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवक शानू रानी तिर्की, सृंखला गोरे और गौरी यादव ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन दर्शन और युवाओं के लिए उनके संदेशों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने सभी प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई तथा हरी झंडी दिखाकर भारत संकल्प दौड़ को रवाना किया। स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक दौड़ में भाग लेकर राष्ट्रीय एकता और अनुशासन का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन अनुष्का सिंह परिहार और अदिति भारतीय ने किया, जबकि सहायक प्राध्यापक कृष्णाराम चौहान ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. शैलेष देवांगन, कंप्यूटर एवं आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार गुप्ता, शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश शाक्य, सहायक प्राध्यापक सुमन मिंज सहित सभी प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह