क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान जरल में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार न्यूट्री कॉन 2026 शुरू

मंडी, 08 जनवरी (हि.स.)। एनीमिया, मधुमेह, मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसे पोषण संबंधी विकारों की रोकथाम और उपचार में आयुर्वेदिक आहार, पाचन शक्ति तथा पारंपरिक भोजन की भूमिका पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार न्यूट्री कॉन 2026 का शुभारम्भ क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, जरल, पंडोह में किया गया। सेमिनार में देशभर से आए विशेषज्ञ आयुर्वेद आधारित पोषण, शोध और नीतिगत पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. वैद्य के. एस. धीमान ने पोषण संबंधी विकारों में अग्नि अर्थात पाचन शक्ति की महत्ता पर जोर देते हुए स्थानीय और पारंपरिक आहार को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताया।

सत्र के सह-अध्यक्ष डॉ. ओम राज शर्मा, पूर्व सहायक निदेशक, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, पण्डोह ने भारत में पोषण संबंधी समस्याओं की बढ़ती चुनौती के समाधान में आयुर्वेदिक आहार नियमावली की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रथम दिन के प्रातःकालीन सत्र में नीति आयोग, नई दिल्ली से डॉ. शोभित ने साक्ष्य आधारित आयुर्वेदिक पोषण तथा पोषण संबंधी विकारों के लिए आयुष आधारित नीतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद आधारित नीतियां एनीमिया, मधुमेह और मोटापे जैसी बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के डॉ. हरीश भाकुनी ने कुपोषण, मोटापा और मधुमेह के प्रबंधन में जौ, आमला, अदरक और मूंग जैसे आयुर्वेदिक आहारों पर आधारित वैज्ञानिक शोध प्रस्तुत किए। अपराह्न सत्र में आयोजित मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों में कुल 42 प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए, जिनमें पोषण संबंधी विकारों के आयुर्वेदिक समाधान से जुड़े विभिन्न विषय शामिल रहे।

इस अवसर पर प्रभारी संस्थान डॉ. विनीता नेगी, डॉ. प्रदीप, प्राध्यापक, राजीव गांधी स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय, पपरोला, अनुसंधान अधिकारी डॉ. कविता व्यास, डॉ. अनुभा चांदला, डॉ. शोभित, मनोज रतुरी सहित अन्य आयुर्वेद विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा