अमृत भारत स्टेशन: विकसित भारत के भविष्य को तैयार रेल गेटवे

गुवाहाटी, 15 जनवरी, (हि.स.)। पिछले एक दशक में, पश्चिम बंगाल के रेल परिदृश्य में एक निर्णायक और स्पष्ट बदलाव आया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारतीय रेलवे पूर्वी भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के नेतृत्व वाली ग्रोथ के सबसे मजबूत साधनों में से एक के रूप में उभरा है। एक समय, भौगोलिक, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर और विषम पहुंच से सीमित रहे ये क्षेत्र आज एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार रेल सिस्टम की ओर एक ऐतिहासिक बदलाव देख रहे हैं।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज बताया

इस बदलाव के केंद्र में अमृत भारत स्टेशन योजना है, जो विश्व का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन पुनर्विकास कार्यक्रम है और सार्वजनिक अवसंरचना में व्यापक पैमाने पर एक नए युग का संकेत देता है।

स्टेशन आधुनिकीकरण के एक कार्यक्रम से कहीं अधिक, अमृत भारत स्टेशन योजना इस बात की एक दूरदर्शी पुनर्कल्पना है कि रेलवे अवसंरचना देश की सेवा किस रूप में करता है। देश भर में पुनर्विकास के लिए 1,300 से अधिक स्टेशनों का चयन किया गया है। यह योजना एक ऐसे नेतृत्व दर्शन को प्रदर्शित करता है, जो इरादे से ज़्यादा परिणामों को निष्क्रियता से अधिक अवसंरचना को प्राथमिकता देता है। ये पुनर्विकास सिर्फ़ बाह्य सुधारों से कहीं ज़्यादा हैं, क्योंकि इनमें आधुनिक यात्री सुविधाएं, दिव्यांगों के अनुकूल सुविधाएं, बेहतर आवागमन, आधुनिक प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना प्रणालियों और स्थानीय विरासत से प्रेरित वास्तुकला शामिल हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि स्टेशन आधुनिक, सुलभ और क्षेत्रीय जड़ों से जुड़े विकास का प्रवेश द्वार बनें।

एक व्यापक और भविष्य के लिए तैयार पहल के रूप में परिकल्पित, अमृत भारत स्टेशन योजना अवसंरचना के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को साकार करती है। स्टेशनों को जीवंत सार्वजनिक स्थानों और आर्थिक प्रवर्तकों में बदलकर, यह योजना क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा प्रदान करती है और समग्र यात्री अनुभव को बेहतर बनाती है।

पश्चिम बंगाल यात्री-केंद्रीत रेल आधुनिकीकरण के लिए तेज़ी से एक बेंचमार्क के तौर पर उभर रहा है। संरक्षा, एक्सेसिबिलिटी और गतिशीलता में महत्वपूर्ण सुधार कर पूरे राज्य में रेल यात्रा का अनुभव बदल रहा हैं।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत, पश्चिम बंगाल में लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निवेश से 101 अमृत भारत स्टेशन बनाए जा रहे हैं। ये स्टेशन बड़े शहरों, सीमावर्ती कस्बों और तीर्थ स्थानों तक फैले हुए हैं और पुनर्विकास संतुलित एवं समावेशी क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित कर रहे हैं।

हावड़ा, सियालदह, न्यू जलपाईगुड़ी, खड़गपुर, आसनसोल, बैण्डेल, मालदा टाउन, सिलीगुड़ी, अलीपुरद्वार, शालिमार और सांतरागाछी जैसे मुख्य स्टेशनों को एक एकीकृत आधुनिकीकरण विज़न के तहत अपग्रेड किया जा रहा है। व्यापक पुनर्विकास परियोजनाएं इस गति को और मज़बूती प्रदान कर रहे हैं। न्यू जलपाईगुड़ी, जिसकी मंज़ूर लागत लगभग 335 करोड़ रुपये है, नए टर्मिनल, एक एयर कॉनकोर्स और बेहतर यात्री इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पूर्वोत्तर के लिए एक आधुनिक गेटवे में रूपान्तरित हो रहा है। सांतरागाछी, जिसके लिए लगभग 380 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। हावड़ा-कोलकाता कॉरिडोर पर दबाव कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए एक प्रमुख मल्टी-मोडल केंद्र के रूप में यह स्टेशन उभर रहा है। आसनसोल और शालिमार में भी लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को मज़बूत करने और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अपग्रेड किए जा रहे हैं।

अब 510 स्टेशनों पर वाई-फाई कनेक्टिविटी उपलब्ध होने के साथ-साथ 250 लिफ्ट लगाने और 400 से ज़्यादा एस्केलेटर चालू किए जाने से यात्रियों की सुविधाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो पहुंच और परिचालन दक्षता पर ज़ोर देता है।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय