पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस गुवाहाटी और कोलकाता के बीच शीघ्र

गुवाहाटी, 10 जनवरी (हि.स.)। गुवाहाटी और कोलकाता के बीच भारतीय रेलवे बहुत शीघ्र वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस शुरू करने जा रहा है। लंबी दूरी की यह ट्रेन, रात्रिकालीन रेल यात्रा में एक प्रमुख माइलस्टोन साबित होगा और पूर्वोत्तर एवं पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज बताया है कि नई पीढ़ी की यह ट्रेन 16 कोच वाली रैक है, जिसमें कुल 823 यात्रियों के आरामदायक यात्रा करने की व्यवस्था है। इसमें 11एसी 3-टियर कोच, 4एसी 2-टियर कोच और एक फर्स्ट-क्लास एसी कोच शामिल हैं, जो विभिन्न यात्री वर्गों के लिए आरामदायक यात्रा के विकल्प प्रदान करते हैं।

यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन किए गए कुशन वाले बर्थ, बेहतर राइड कम्फर्ट के लिए एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम, नवाइज़ रिडक्शन सिस्टम, वेस्टिब्यूल के साथ ऑटोमैटिक दरवाज़े और एक आधुनिक पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम होगा। दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था, आधुनिक शौचालय और एडवांस्ड डिसइंफेक्टेंट तकनीक स्वच्छता, पहुंच और ट्रेन के अंदर आराम को और बेहतर बनाते है।

संरक्षा, वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की एक खास पहचान है। यह ट्रेन कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी पैसेंजर टॉक-बैक यूनिट और एडवांस्ड कंट्रोल के साथ एक अत्याधुनिक ड्राइवर कैब से लैस है। इसका एयरो डायनामिक बाहरी हिस्सा और शानदार इंटीरियर स्वदेशी रेल इंजीनियरिंग और डिज़ाइन में नवीनतम उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है।

इस सेवा की शुरुआत से असम और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने की उम्मीद है। प्रमुख लाभार्थी जिलों में असम का कामरूप मेट्रोपॉलिटन एवं बंगाईगांव और पश्चिम बंगाल का कोचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्द्धमान, हुगली और हावड़ा शामिल हैं। यह सेवा क्षेत्रीय गतिशीलता को सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ व्यापार, पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगी।

भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत भारतीय रेलवे के नवाचार, यात्री-केंद्रित सेवाओं और देश के लिए एक आधुनिक, भावी रेल नेटवर्क के विजन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय