नापाक पाकिस्तान फिर रच रहा जम्मू संभाग में आतंकी साजिश डिजिटल जासूसी नेटवर्क तक फैले खतरे के संकेत बड़ा हमला हुआ तो ‘ऑपरेशन सिंदूर 2

 

स्टेट समाचार ब्यूरो / संजय कुलश्रेष्ठ
जम्मू, 21 सितंबर। जम्मू संभाग में आतंकवाद को दोबारा खड़ा करने की पाकिस्तान की साजिश के लगातार नए संकेत सामने आ रहे हैं। उधमपुर के घने जंगलों में जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आतंकवादियों की मौजूदगी, सीमावर्ती कठुआ में कथित डिजिटल जासूसी नेटवर्क और पांच संवेदनशील जिलों में बढ़ाई गई सतर्कता ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

सुरक्षाबलों ने आतंकियों के संभावित ठिकानों, मददगारों और सीमा पार बैठे हैंडलरों से जुड़े नेटवर्क की तलाश तेज कर दी है। इन घटनाक्रमों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में फिर कोई बड़ा हमला करने में सफल होते हैं तो क्या भारत जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी दूसरी निर्णायक कार्रवाई कर सकता है?

हालांकि ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ को लेकर सरकार या सेना की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार से होने वाले किसी भी बड़े आतंकी हमले का जवाब अपने समय और अपनी शर्तों पर दिया जाएगा।

‘ऑपरेशन सोहन’ में दो पाकिस्तानी आतंकी ढेर

उधमपुर जिले के मजालता क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सोहन’ में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया था। मारे गए आतंकवादियों की पहचान सद्दाम और मुस्तफा के रूप में बताई गई है।

यह अभियान भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने संयुक्त रूप से चलाया। आतंकियों के ठिकाने से एके असॉल्ट राइफल, एम-4 कार्बाइन, ग्लॉक पिस्तौल, हथगोले और अन्य गोला-बारूद बरामद किया गया।

अत्याधुनिक विदेशी हथियारों की बरामदगी से संकेत मिलता है कि आतंकियों को सीमा पार से हथियार और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस आतंकी समूह को जम्मू संभाग में किस उद्देश्य से भेजा गया था और क्या वह किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहा था।

घने जंगलों में तलाशी अभियान जारी

मजालता और आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान जारी है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि मारे गए आतंकवादियों के साथ कुछ अन्य आतंकी अथवा स्थानीय सहयोगी भी मौजूद हो सकते हैं। कठिन पहाड़ी भूभाग, घने जंगल और खराब मौसम का लाभ उठाकर आतंकी एक जिले से दूसरे जिले में जाने का प्रयास कर सकते हैं।

खतरे को देखते हुए उधमपुर के साथ कठुआ, सांबा, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में निगरानी एवं तलाशी बढ़ाई गई है। जंगलों, पहाड़ी रास्तों, नदी-नालों और पुराने घुसपैठ मार्गों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों और मोबाइल संचार नेटवर्क की भी निगरानी की जा रही है।

कठुआ में हाई-टेक जासूसी का मामला

इस बीच कठुआ में सामने आए कथित हाई-टेक जासूसी मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। जांच में एक युवक पर सिम कार्ड से संचालित कैमरे के माध्यम से सेना की गतिविधियों और वाहनों की आवाजाही से संबंधित जानकारी पाकिस्तान स्थित हैंडलरों तक पहुंचाने का आरोप लगा है।

बताया गया है कि आरोपी को सोशल मीडिया के माध्यम से हनीट्रैप में फंसाया गया और कथित रूप से विदेश से धन भी भेजा गया। मामले की डिजिटल एवं फॉरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी के संपर्क में अन्य लोग भी थे या नहीं और पाकिस्तान स्थित हैंडलरों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कोई बड़ा जासूसी नेटवर्क तो खड़ा नहीं किया है।

अब आतंकवाद का जवाब घर में घुसकर देने की नीति

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई की थी। भारत ने इस कार्रवाई को आतंकी ढांचे के खिलाफ केंद्रित, संतुलित और गैर-उकसावे वाली कार्रवाई बताया था।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत ने अपनी सैन्य कार्रवाई केवल स्थगित की है और भविष्य में होने वाले किसी भी आतंकी हमले का जवाब अपने तरीके तथा अपनी शर्तों पर दिया जाएगा। भारत की इस बदली हुई नीति ने संदेश दिया कि पाकिस्तान की धरती से होने वाले आतंकी हमले को केवल कानून-व्यवस्था की घटना नहीं माना जाएगा।

इसी कारण जम्मू संभाग में चल रही वर्तमान आतंकी गतिविधियों को बेहद गंभीरता से देखा जा रहा है। यदि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन किसी बड़े हमले को अंजाम देते हैं और जांच में उसके तार सीमा पार स्थित आतंकी ढांचे से जुड़ते हैं तो भारत की ओर से एक और लक्षित जवाबी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ऐसी संभावित कार्रवाई को राजनीतिक और मीडिया हलकों में ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ कहा जा सकता है, लेकिन इसका निर्णय खतरे की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों और केंद्र सरकार के सुरक्षा आकलन पर निर्भर करेगा।

स्थानीय सहयोगियों की पहचान बड़ी चुनौती

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन अब केवल पारंपरिक घुसपैठ पर निर्भर नहीं हैं। वे सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मोबाइल एप्स, ड्रोन, डिजिटल भुगतान, हनीट्रैप और छोटे स्थानीय मॉड्यूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आतंकियों को भोजन, आश्रय, सुरक्षित रास्तों की जानकारी और सुरक्षाबलों की गतिविधियों से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराने वाले ओवरग्राउंड वर्करों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ का विशाल वन क्षेत्र आतंकियों के लिए छिपने और आवाजाही करने के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।

जनता से सतर्क रहने की अपील

सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि जंगलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी संदिग्ध व्यक्ति, अनजान वाहन, परित्यक्त सामान अथवा असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। सोशल मीडिया पर अज्ञात प्रोफाइल से संपर्क, पैसों के लालच या आपत्तिजनक सामग्री के माध्यम से ब्लैकमेल किए जाने की स्थिति में भी संबंधित एजेंसी को तत्काल सूचित किया जाए।

ताजा घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी तंत्र जम्मू संभाग में अशांति फैलाने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। सेना, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई ने उसकी साजिश को बड़ा झटका दिया है, लेकिन जंगलों में जारी तलाशी और डिजिटल जासूसी नेटवर्क की जांच बताती है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

फिलहाल ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ केवल एक संभावित सुरक्षा परिदृश्य है, कोई घोषित सैन्य अभियान नहीं। लेकिन भारत का संदेश स्पष्ट है—यदि पाकिस्तान की धरती से फिर कोई बड़ा आतंकी हमला हुआ तो इस बार जवाब पहले से अधिक कठोर हो सकता है।