सिक्किम विकसित भारत के दृष्टिकोण की ओर मार्गदर्शन करने वाला केंद्रीय उत्प्रेरक : नीति आयोग उपाध्यक्ष

गंगटोक, 14 जनवरी (हि.स.)। सिक्किम सरकार ने नीति आयोग के सहयोग से बुधवार को गंगटोक में “फ्रंटियर स्टेट डेवलपमेंट: फोकस ऑन नॉर्थ ईस्ट” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्य, आजीविका, संपर्क और सुरक्षा के एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से फ्रंटियर क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए रणनीतियों की पहचान करना था।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी ने नीति आयोग के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए विकसित भारत के संदर्भ में उत्तर–पूर्वी क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सिक्किम की स्वच्छता और शांत वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में वैश्विक मंच पर विभिन्न माध्यमों से अपनी पहचान स्थापित करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने सिक्किम को विकसित भारत के दृष्टिकोण की ओर अन्य राज्यों का मार्गदर्शन करने वाला केंद्रीय उत्प्रेरक सतारा।

सिक्किम सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. महेंद्र पी. लामा ने अपने संबोधन में नए विकास ध्रुव के निर्धारकों और घटकों पर बात करते हुए सीमा को अवसर के रूप में देखने, 4×4 कनेक्टिविटी मैट्रिक्स, रिवर्स इंटीग्रेशन तथा नए विकास मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल और उत्तर–पूर्वी क्षेत्र को शामिल करते हुए उत्तर–पूर्वी क्षेत्र को भारत और पूर्वी दक्षिण एशिया का नया विकास ध्रुव बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह ढांचा एक्ट ईस्ट नीति, नेबरहुड फर्स्ट नीति, विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत 2047 को मजबूती प्रदान करेगा।

नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने सिक्किम की तीव्र आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि इसकी उपलब्धियों को अन्य उत्तर–पूर्वी राज्यों और देश के साथ साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और सिक्किम पहले से ही प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

सिक्किम सरकार के मुख्य सचिव आर. तेलांग ने सतत कृषि, हथकरघा, हस्तशिल्प और आधुनिक उद्योगों के विकास में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।‌ उन्होंने हरित और टिकाऊ प्रथाओं को उत्तर–पूर्वी राज्यों के विकास की आधारशिला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम, विकसित भारत 2047 और सीमापार आर्थिक गतिविधियों का भी उल्लेख किया। कार्यशाला में सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, असम और त्रिपुरा के सफल मॉडलों को प्रस्तुत करते हुए अंतर–राज्यीय सहयोग के लिए एक साझा मंच तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Bishal Gurung