विकसित भारत जी-राम जी अधिनियम को लेकर विपक्ष जनता को कर रही गुमराह- रिजिजू

इटानगर (अरुणाचल), 16 जनवरी (हि.स.)। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार को विकसित भारत जी-राम जी अधिनियम को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि देश के लोग जल्द ही इसके दूरगामी लाभों को महसूस करेंगे।

अरुणाचल प्रदेश के बिचोम जिले के बाना में अका जनजाति के स्वर्ण जयंती सरोक उत्सव के अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत जी-राम जी अधिनियम एक परिवर्तनकारी कदम है जिसका उद्देश्य रोजगार के अवसरों में सुधार करके और गांवों में समग्र विकास को गति देकर ग्रामीण भारत को मजबूत करना है।

रिजिजू ने कहा कि इस अधिनियम को ग्रामीण समुदायों के उत्थान और स्थायी आजीविका सृजन के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया गया है। “विपक्ष अधिनियम के बारे में गलत सूचना फैला रहा है, लेकिन सच्चाई बहुत जल्द सामने आएगी।

उन्होंने कहा, “यह कानून ग्रामीण भारत के रोजगार और विकास परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।”

समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि यह अधिनियम जमीनी स्तर की संस्थाओं को सशक्त बनाने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि विकास अंतिम छोर तक पहुंचे।

नाम परिवर्तन मात्र नहीं, बल्कि हाल ही में पारित नए अधिनियम में ग्रामीण बेरोजगारों को सहायता प्रदान करने के व्यापक अवसर हैं।इस अधिनियम में उन लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान है जिन्हें वर्ष के दौरान काम नहीं मिलता।

कई बार यह कार्य जारी रहा है और हम पिछले दो कार्यकालों से ऐसा कर रहे हैं। तीसरे कार्यकाल में भी इसे जारी रखा गया है ताकि देश के सबसे बड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बसे गांवों और लोगों के जीवन स्तर और आजीविका को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान करने की गारंटी देता है। इस अधिनियम से प्रावधानों के तहत निधि के कुप्रबंधन में कमी आएगी। कार्यदिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान पूर्व मंत्री तागे ताकी, अशोक संगचोजू, जोरम ताथ, अजू खुंजुजू और जिला इकाई अध्यक्ष एवं कार्यकारी सदस्यों सहित राज्य पार्टी के वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी