उत्तरकाशी, 01 जनवरी (हि.स.)। भटवाड़ी विकासखंड के कई गांव के प्रधानों ने भैरोघाटी से झाला के बीच चौड़ीकरण और तेखला-हीना बाईपास निर्माण के लिए मिली वन भूमि स्वीकृति का विरोध किया है। उनका कहना है कि गंगोत्री और हर्षिल घाटी में 42 हेक्टेयर और बाईपास के लिए 17 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के लिए स्वीकृति मिली है। इससे प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान होगा। इसलिए पहाड़ी क्षेत्रों में हाईवे चौड़ीकरण के मानक 18 फीट ही होने चाहिए।
भटवाड़ी विकासखंड के हर्षिल, पुराली, सुक्की, धराली, गणेशपुर, हीना, नेताला, पाटा आदि गांव के प्रधानों ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है। इसमें प्रधान सुचिता रोतेला, मधु राणा, जयवेंद्र राणा, अरविंद रावत, अंजू, अजय नेगी ने कहा कि भैरो घाटी से झाला के बीच में सड़क चौड़ीकरण के लिए 42 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई है। इसमें 10 हेक्टेयर वन भूमि मात्र डंपिंग जोन के लिए आवंटित की गई है।
दूसरी ओर, गंगोत्री हाईवे चारधाम चौड़ीकरण परियोजना के तेखला हीना नेताला बाईपास के लिए 17 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई है। यह स्वीकृति सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाईपावर कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ है। प्रधानों का कहना है कि अगर इतनी अधिक संख्या में वनों का कटान होता है तो यह प्राकृतिक संपदा को नुकसान के साथ ही भविष्य में बड़ी आपदा का रूप ले सकती है। इसलिए हाईवे का एलाइनमेंट यथावत रखा जाए।
इसके साथ ही पहाड़ों में हाईवे चौड़ीकरण के मानकों को 18 फीट ब्लैकटॉप के अनुसार ही किया जाए।
उन्होंने स्वीकृति को निरस्त करने की मांग की है। इस संबंध में ग्राम सभाओं की बैठक में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / चिरंजीव सेमवाल



