अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का 86वां सम्मेलन लखनऊ में, 19 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे उद्घाटन
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- Jan 18, 2026
-86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन -भारत की विधानसभाओं व विधान परिषदों के सचिवों का 62वां सम्मेलन-सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन विधान भवन, लखनऊ में होगा
लखनऊ , 18 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन एवं भारत की विधानसभाओं व विधान परिषदों के सचिवों का 62वां सम्मेलन 19 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित है। इस राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी उत्तर प्रदेश विधानमंडल द्वारा की जा रही है। सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे और समापन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल करेंगी । सम्मेलन के पहले दिन शाम को विधानसभा की भीति और गुंबद पर यूपी पर्यटन विभाग की तरफ से यूपी के पश्चिम से पूरब तक के जिलों व शहरों के वर्णन विवरण की लाइट साउंड से आकर्षक प्रस्तुति होगी। सम्मेलन के तीसरे दिन आमंत्रित अतिथि अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर के दर्शन करेंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 19 जनवरी को विधान भवन, लखनऊ में सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन सत्र में संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदर्शनी का उद्घाटन, समूह चित्र एवं विभिन्न समितियों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। सम्मेलन में देश भर से आ रहे पीठासीन अधिकारी, सचिव एवं गणमान्य प्रतिनिधि विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं, सदन संचालन, सुशासन तथा समसामयिक विधायी विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करेंगे।
इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ, उपसभापति, राज्यसभा हरिवंश नारायण सिंह, सभापति विधान परिषद कुंवर मानवेंद्र सिंह एवं उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी, सभापति, अध्यक्ष एवं सचिव सहभागिता करेंगे। उद्घाटन के अगले दिन 20 जनवरी को पूर्ण सत्र के दौरान एजेंडा बिंदुओं पर गहन चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन भी प्रस्तावित है।
21 जनवरी को समापन सत्र में विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों के प्रेरक संबोधन होंगे। सम्मेलन के दौरान विधायी परंपराओं, संसदीय नवाचारों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित किया जाएगा। सम्मेलन के उपरांत 22 जनवरी को प्रतिभागी अयोध्या धाम भ्रमण कर श्री राम लला जी के दर्शन करेंगे जबकि 23 जनवरी को प्रतिनिधियों का प्रस्थान होगा। यह सम्मेलन संसदीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान तथा विधायी संस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह



