यमुनानगर धान घोटाला में आरोपी परिवार की संपत्तियां अटैच

यमुनानगर, 05 जनवरी (हि.स.)। यमुनानगर में बहुचर्चित धान घोटाले की जांच के साथ-साथ अब प्रशासनिक कार्रवाई भी निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्य आरोपी राइस मिलर संदीप सिंघला की गिरफ्तारी के बाद अब घोटाले से जुड़ी संपत्तियों पर सीधी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने साेमवार काे संदीप सिंघला की पत्नी रितिका सिंघला के खिलाफ लैंड रेवेन्यू एक्ट के तहत कदम उठाते हुए यमुनानगर स्थित उनकी संपत्तियों को अटैच कर लिया है। पूरा मामला फिलहाल विशेष जांच टीम (एसआईटी) के पास है, जो आर्थिक लेन-देन, धान के गबन और विभागीय भूमिका की हर कड़ी को खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि एक ही परिसर में चार राइस मिलें संचालित हो रही थी,जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी स्थिति अलग दर्शाई गई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर घोटाले को अंजाम देना संभव नहीं था, इसी कारण अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अनुसार, एमएस वर्ष 2024–25 के दौरान न्यू किसान राइस मिल द्वारा करीब दो करोड़ रुपये का डिफॉल्ट किया गया था। इस मामले में मिल मालिक की जमीन, मकान और राइस मिल को पहले ही कुर्क किया जा चुका है और विभाग के पास संपत्ति से संबंधित पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। प्रशासन अब अगली प्रक्रिया के तहत कुर्क संपत्तियों की वास्तविक पोजेशन लेने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले मौके पर डिमार्केशन कराया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि संपत्ति की सीमाएं कहां तक हैं और कितना क्षेत्र सरकारी दायरे में आता है। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि मिल मालिक की एक अन्य राइस मिल ‘किसान राइस मिल’ है, जो हैफेड के अंतर्गत पंजीकृत है। दोनों मिलें एक-दूसरे से सटी हुई हैं और दोनों ही मामलों में डिफॉल्ट पाया गया है। हैफेड विभाग ने भी अपनी ओर से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डिमार्केशन के दौरान फूड सप्लाई विभाग के दो इंस्पेक्टर, अकाउंट्स शाखा का कर्मचारी, ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार