पंचायत चुनाव को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने फैसला रखा सुरक्षित

शिमला, 07 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में तय समय पर पंचायत चुनाव करवाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायत चुनाव टालने की सरकार की कोई मंशा नहीं है लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए चुनाव करवाने के लिए कम से कम छह महीने का समय जरूरी है। सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदेश में नई पंचायतों, पंचायत समितियों और नगर निगमों के परिसीमन यानी सीमाओं के निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। इस वजह से समय पर पंचायत चुनाव करवाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।

वहीं याचिकाकर्ताओं ने सरकार की इस दलील पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आपदा या परिसीमन का हवाला देकर पंचायत चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालना उचित नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नई पंचायतों और जिला परिषदों के परिसीमन की प्रक्रिया चुनाव संपन्न होने के बाद भी जारी रखी जा सकती है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि पंचायत चुनाव समय पर करवाना राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है। परिसीमन जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आधार पर चुनावों को टालना संविधान की भावना के खिलाफ है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस अहम मामले में अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह साफ होगा कि हिमाचल में पंचायत चुनाव कब और किस स्थिति में कराए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा