कैबिनेट फैसले सिर्फ कागज़ों में, ज़मीन पर नाकाम सरकार: सुरेश कश्यप
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- Jan 19, 2026
शिमला, 19 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुरेश कश्यप ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार लंबी–चौड़ी घोषणाओं और आंकड़ों के सहारे अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक कैबिनेट बैठक में 50 से अधिक एजेंडे गिनाने से शासन सफल नहीं माना जा सकता, असली कसौटी यह है कि फैसलों का असर जमीन पर दिखे, जो अभी तक नजर नहीं आ रहा है।
सुरेश कश्यप ने सोमवार को एक बयान में कहा कि कैबिनेट बैठक में मेडिकल कॉलेजों में पद सृजन, कैंसर विभाग खोलने, तकनीकी स्टाफ की भर्ती और स्टाफ नर्स की आयु सीमा बढ़ाने जैसे फैसले सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन सरकार यह बताए कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों की हालत खराब क्यों हुई। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आज नई भर्तियों की बात की जा रही है, जबकि पहले से स्वीकृत कई पद वर्षों से खाली पड़े हैं।
उन्होंने राजस्व विभाग का हवाला देते हुए कहा कि तहसीलों में मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है और तहसीलदारों व पटवारियों की भारी कमी है। अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने का फैसला इस बात का प्रमाण है कि सरकार समय रहते स्थायी भर्तियां करने में असफल रही। यदि पहले ही नियमित नियुक्तियां की जातीं तो ऐसे अस्थायी फैसलों की जरूरत नहीं पड़ती।
भाजपा नेता ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी, जिपलाइन परियोजनाएं, जल विद्युत और जियोथर्मल ऊर्जा जैसे मुद्दों पर सरकार वर्षों से योजनाएं बना रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य पहले से कर्ज के बोझ में है तो इन परियोजनाओं के लिए धन कहां से आएगा और आम लोगों को इनका लाभ कब मिलेगा।
सुरेश कश्यप ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आंगनवाड़ी और क्रेच वर्करों तथा औद्योगिक नीति को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार केवल नियमों में संशोधन और योजनाओं के विस्तार की बात कर रही है, जबकि पेंशन और मानदेय के भुगतान में देरी, अनिश्चितता और बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी हुई है। उनके मुताबिक घोषणाएं अब सरकार की नीयत नहीं बल्कि उसकी विफलताओं को ढकने का जरिया बन गई हैं।
पंचायत चुनावों, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सुरेश कश्यप ने सरकार की स्थिति को असमंजस भरा बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर हाई कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया जाता है, दूसरी ओर फैसलों को लेकर टालमटोल की स्थिति बनी रहती है, जो सरकार की दिशाहीनता और निर्णय लेने में कमजोरी को दिखाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा



