महाकाल मंदिर पर राजनीति तेज, शिलान्यास से पहले आमने-सामने तृणमूल और भाजपा

सिलीगुड़ी,16 जनवरी (हि.स)। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिलीगुड़ी में प्रस्तावित महाकाल मंदिर का शुक्रवार को शिलान्यास करेंगी। इस कार्यक्रम को लेकर उत्तर बंगाल की राजनीति गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस जहां इसे विकास और धार्मिक पर्यटन से जोड़कर देख रही है, वहीं भाजपा ने मंदिर निर्माण की लागत और राज्य सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

गुरुवार को दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा के केंद्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट ने सिलीगुड़ी में पत्रकार वार्ता कर कहा कि मंदिर का निर्माण ट्रस्टी बोर्ड के माध्यम से होने की बात कही जा रही है, लेकिन पूरा आयोजन सरकारी बैनर तले हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी स्तर से ही निमंत्रण पत्र क्यों भेजे जा रहे हैं और मंदिर निर्माण के लिए धन का स्रोत क्या है? उनके साथ इस दौरान भाजपा विधायक शंकर घोष, दुर्गा मुर्मू, आनंदमय बर्मन और जिलाध्यक्ष अरुण मंडल मौजूद थे।

भाजपा के आरोपों पर सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव ने पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह के बयानों का जवाब देने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, महाकालधाम बंगाल के विकास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनेगा और कार्यक्रम तय समय पर होगा।

कार्यक्रम में आमंत्रित पद्मश्री सम्मानित भवाईया गायिका गीता राय बर्मन ने शिलान्यास समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पद्मश्री मिलने के बाद भी उन्हें राज्य और ब्लॉक स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दूर रखा गया है। हालांकि, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लेखक नगेंद्रनाथ राय के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई गई है।

2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तृणमूल कांग्रेस के लिए यह परियोजना प्रतिष्ठा की लड़ाई मानी जा रही है। हालांकि मंदिर शिलान्यास को लेकर शहर में अपेक्षित प्रचार न होने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार