मौसम के बिगड़े मिजाज को देख किसानों की उड़ी नींद, आलू और सरसों की फसल को हो सकता नुकसान

फर्रुखाबाद,2 जनवरी (हि.स.)। घने कोहरे के बजह से बढ़ी सर्दी और शुक्रवार को हुई बूंदाबांदी से किसानों के माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई हैं। इस बूंदाबांदी का बुरा असर सरसो और आलू की फसल पर पड़ेगा। पिछले दो सप्ताह से जिले में लगातार सर्दी का प्रभाव देखा जा रहा है। जिसमें कभी कोहरा छाया तो कभी पाला गिरने की घटनाएं सामने आईं। शुक्रवार सुबह कोहरा हल्का रहा और विजिबिलिटी 50 मीटर से अधिक दर्ज की गई। इटावा-बरेली हाईवे समेत जिले के अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहन चालक लाइटें जलाकर सावधानीपूर्वक निकलते दिखाई दिए।

मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 10.3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता 29 प्रतिशत रही। मौसम विभाग ने अगले एक-दो दिनों में बारिश होने की संभावना जताई है, जिससे सर्दी और बढ़ने का अनुमान है। यह मौसम किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। क्योंकि अचानक बारिश और ठंडी हवाओं से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।

किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। किसान बलवीर सिंह,रावेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश से गेहूं, आलू और सरसों की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि पहले ही पाला और कोहरे ने फसलों, खासकर आलू की फसल को नुकसान पहुंचाया है और अब तंबाकू की फसल पर भी बारिश से संकट मंडरा रहा है। किसानों ने कहा कि यदि बारिश अधिक हुई तो फसलों की पैदावार घट सकती है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

किसान मौसम की इस अनिश्चितता से परेशान हैं और वे सरकार और कृषि विभाग से उचित सलाह और समय पर राहत उपायों की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं आम लोग भी ठंड के कारण सुबह-शाम की यात्रा में परेशानी महसूस कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सर्द हवाओं और बारिश के मिलाजुला प्रभाव से जिले का तापमान और गिर सकता है और किसानों को अपने खेतों और फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।

इस तरह फर्रुखाबाद में मौसम ने ठंड और बारिश के मिश्रित असर से लोगों और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने की संभावना है। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि किसानों को अपनी आलू व सरसो की फसल पर छिड़काव करते रहना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / Chandrapal Singh Sengar