'एक पृथ्वी, एक परिवार' सिद्धांत के तहत भारत न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन को देगा गति: प्रल्हाद जोशी

नई दिल्ली, 11 जनवरी (हि.स.)। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में रविवार को अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की 16वीं सभा में बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने न्यायसंगत और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के लिए भारत के मजबूत समर्थन को रेखांकित किया।

तीन दिवसीय सत्र का मुख्य विषय मानवता को शक्ति प्रदान करना: साझा समृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा है। इसमें उन्होंने न्यायसंगत, समान, किफायती और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इस दौरान, मंत्री ने यूएई की जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ आमना बिन्त अब्दुल्ला अल दहाक से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-यूएई सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। बातचीत का मुख्य केंद्र नवीकरणीय ऊर्जा, विकेन्द्रीकृत ऊर्जा समाधान, विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण, प्रौद्योगिकी सहयोग और मिश्रित वित्त में सहयोग बढ़ाना था।

​विधानसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'वसुधैव कुटुंबकम' (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) के सिद्धांत और समानता, समावेशिता तथा नीतिगत स्थिरता पर आधारित दीर्घकालिक दृष्टिकोण से निर्देशित है। ​उन्होंने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत क्षमता और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को दोहराया।

​श्री जोशी ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत ने 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल कर लिया है, जो पेरिस समझौते के तहत निर्धारित अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्य से पांच साल पहले है।

​भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 266 गीगावॉट से अधिक हो गई है, जिससे देश नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।

​दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते प्रमुख ऊर्जा बाजारों में से एक के रूप में, भारत ऊर्जा भंडारण समाधानों, ग्रिड आधुनिकीकरण, हरित ऊर्जा गलियारों और हाइब्रिड/चौबीसों घंटे चलने वाली नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं जैसी नवीन बोली प्रक्रियाओं के माध्यम से विश्वसनीय और लचीली विद्युत प्रणालियों को प्राथमिकता दे रहा है।

​मंत्री ने सौर, पवन, बैटरी और इलेक्ट्रोलाइजर जैसे क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण का विस्तार करने के भारत के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, जो राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और विविध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में योगदान दे रहे हैं।

​मंत्री ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन के जन-केंद्रित स्वरूप पर जोर दिया और दो प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया। इनमें प्रधानमंत्री सूर्य घर और ​प्रधानमंत्री-कुसुम योजना है।

​जोशी ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के लिए अभूतपूर्व निवेश और सहयोग की आवश्यकता होगी। अकेले भारत को ही 2030 तक लगभग 300 अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, भंडारण, हरित हाइड्रोजन, ग्रिड और विनिर्माण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी