सामुदायिक कुत्तों पर वैज्ञानिक नीति की मांग, जंतर मंतर पर प्रदर्शन
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- Jan 04, 2026
नई दिल्ली, 04 जनवरी (हि.स.)। राजधानी दिल्ली समेत देश के 50 से अधिक शहरों में रविवार को नागरिकों, विशेषज्ञों और सार्वजनिक हस्तियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सामुदायिक कुत्तों के लिए वैज्ञानिक, कानूनी और मानवीय नीति की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सामुदायिक कुत्तों को बड़े पैमाने पर हटाने और शेल्टर में बंद करने की नीति न सिर्फ अवैज्ञानिक है, बल्कि इससे रेबीज नियंत्रण प्रयास कमजोर होंगे, शहरी पारिस्थितिकी असंतुलित होगी और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब व वंचित तबकों पर पड़ेगा।
गलत सूचना से बना नीतिगत दबाव
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में मीडिया में आई भ्रामक और सनसनीखेज खबरों ने भय का माहौल बनाया। जिस रिपोर्ट के आधार पर मौजूदा सुओ मोटो कार्यवाही शुरू हुई, उसमें एक बच्चे की दुखद मौत को गलत तरीके से रेबीज से जोड़ा गया, जबकि बाद में आधिकारिक रिकॉर्ड ने इस दावे को खारिज कर दिया। इसके बावजूद, इसी गलत जानकारी को आधार बनाकर लाखों जानवरों और लोगों को प्रभावित करने वाले निर्देश जारी किए गए।
2000 से अधिक नागरिकों का खुला पत्र
देशभर के 2000 से अधिक नागरिकों द्वारा हस्ताक्षरित एक खुले पत्र में मेगा-शेल्टर मॉडल पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्र पर फिल्मकार मीरा नायर, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली और कठपुतली कलाकार दादी पदमजी जैसे कई प्रतिष्ठित नामों के साथ डॉक्टर, पशु चिकित्सक, वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह मॉडल हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ डालेगा, जबकि इससे सार्वजनिक सुरक्षा बेहतर होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
एबीसी-एआरवी लागू ही नहीं हुआ
विशेषज्ञों ने साफ कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन (ABC-ARV / CNVR) नीति को कभी भी आवश्यक पैमाने पर लागू ही नहीं किया गया। कई राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामों में खुद सरकारों ने स्वीकार किया है कि टीकाकरण और नसबंदी की कवरेज अंतरराष्ट्रीय मानकों से काफी कम है। ऐसे में इसे ‘एबीसी की विफलता’ कहना भ्रामक है—विफलता नीति की नहीं, उसके क्रियान्वयन की है।
जंतर-मंतर पर जुटा जनसैलाब
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु कल्याण और नागरिक समाज से जुड़े कई वक्ताओं ने भाग लिया। इनमें अंबिका शुक्ला, गौरी मौलेखी, मानवि राय, गौरी पुरी, योगिता भायना और टीचर्स एसोसिएशन ऑफ एनिमल राइट्स के चेयरमैन महा सिंह शर्मा शामिल रहे।
स्थानीय फीडर्स, आरडब्ल्यूए पदाधिकारी और पशु प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्हें वक्ताओं ने “कल्याण के असली चैम्पियन” बताया। सांस्कृतिक जगत से मोहित चौहान और राहुल राम ने भी एकजुटता में प्रस्तुति दी।
50 से अधिक शहरों में एक साथ प्रदर्शन
मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम सहित देश के 50 से अधिक शहरों में एक साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
सामुदायिक कुत्तों को बड़े पैमाने पर हटाने और बंद करने के निर्देशों पर तत्काल रोक
सुप्रीम कोर्ट में पशु चिकित्सकों, महामारी विशेषज्ञों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, पारिस्थितिकीविदों और पशु-व्यवहार वैज्ञानिकों को सुनवाई में शामिल किया जाए
कानून के अनुसार ABC-ARV के लिए उचित फंडिंग, निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए
प्रदर्शनकारियों का कहना है, “यह आंदोलन सार्वजनिक सुरक्षा के खिलाफ नहीं, बल्कि विज्ञान, जवाबदेही और करुणा के जरिए उसकी रक्षा के लिए है।”
‘करो या मरो’ के इस आह्वान के साथ नागरिकों ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते दिशा नहीं बदली गई, तो इसके परिणाम अपूरणीय होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी



