सरकारी अस्पताल में इलाज न मिलने से भड़के लोग, बीएमओएच को घेर कर विरोध
- Admin Admin
- Jan 10, 2026
मालदा, 10 जनवरी (हि.स)। राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर उजागर हुई है। जिले के हरिश्चंद्रपुर में एक प्रसूता को आठ घंटे तक बिना इलाज के छोड़ देने और ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ की अनियमित उपस्थिति के आरोपों को लेकर शनिवार को हंगामा खड़ा हो गया। हरिश्चंद्रपुर–2 ब्लॉक के मशालदह बाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हालात इतने बिगड़ गए कि अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को एक गर्भवती महिला को अस्पताल लाया गया था, लेकिन केवल एक “घोषणापत्र” जमा न कर पाने के कारण उसका इलाज शुरू नहीं किया गया। पीड़ा में तड़पती महिला को लगातार आठ घंटे तक यूं ही छोड़ दिया गया और बाद में उसे रेफर कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के बड़े ग्रामीण इलाके की निर्भरता है, बावजूद इसके यहां गंभीर लापरवाही बरती जाती है।
वहीं, मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि ब्लॉक स्वास्थ्य अधिकारी (बीएमओएच ) तापस कुमार मुखोपाध्याय नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते और सामसी में अपने निजी क्लिनिक में अधिक समय देते हैं। अस्पताल में अक्सर केवल एक ही डॉक्टर मौजूद रहता है। दवाइयों या इंजेक्शन की जरूरत पड़ने पर नर्सों को फोन पर अधिकारी की अनुमति के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
इधर, शनिवार को जैसे ही बीएमओएच अस्पताल पहुंचे, मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें घेरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुस्साई भीड़ से बचने के लिए उन्होंने मीडिया कैमरों को रोकने की कोशिश की और बिना कोई जवाब दिए वहां से भागते नजर आए। आरोप यह भी है कि अस्पताल के बाहर चल रहे दवा दुकानों और निजी क्लीनिकों को फायदा पहुंचाने के लिए अस्पताल में सिंडिकेट राज चलाया जा रहा है।
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और मंत्रियों के संरक्षण में स्वास्थ्य विभाग में अराजकता और दलाल चक्र फल-फूल रहा है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि यदि किसी डॉक्टर की लापरवाही सामने आती है तो प्रशासन उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा।
फिलहाल, मालदा के इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं को लेकर आम लोगों में भारी नाराजगी है। अब सभी की नजर जिला स्वास्थ्य विभाग पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार



