बाबा बागेश्वर नाथ के उद्बोधन से गूंजा बांदा, पांच दिन में 20 से 30 लाख श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया

बांदा, 20 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में मवई बाईपास चौराहे पर आयोजित पांच दिवसीय हनुमंत कथा के अंतिम दिन आस्था के महासागर में तब्दील हो गया। बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर नाथ) के ओजस्वी, निर्भीक उद्बोधन ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के विराम दिवस पर लाखों श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर पहुंचकर भगवान श्रीराम और हनुमान जी की महिमा का श्रवण किया। जय श्रीराम और जय हनुमान के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा क्षेत्र राममय और हनुमानमय हो उठा।

बाबा बागेश्वर नाथ ने अपने उद्बोधन में सनातन धर्म, भक्ति, राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम स्वयं मंगल भवन हैं और हनुमान जी मंगलमूर्ति के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान श्रीराम की शरण के बिना जीवन में मंगल की कल्पना भी संभव नहीं है। उन्होंने हनुमान भक्ति को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि हनुमान जी की भक्ति ही भगवान श्रीराम की कृपा दिलाने का माध्यम बनती है।

कथा के दौरान बाबा बागेश्वर नाथ ने अहिरावण प्रसंग के माध्यम से हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप की महिमा का विस्तार से वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों पर चर्चा करते हुए कहा कि वैज्ञानिक भाषा में इन्हें पॉजिटिव और निगेटिव एनर्जी कहा जाता है। हनुमान चालीसा की चौपाई “भूत-पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै” की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जब मन भगवान को समर्पित हो जाता है, तब कोई भी नकारात्मक शक्ति पास नहीं फटक सकती।

उन्होंने माता-पिता और गुरु की महिमा का भी बखान करते हुए कहा कि जिसने माता-पिता की डांट और गुरु की कठोर सीख नहीं पाई, उसका जीवन कभी सफल नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने सनातन धर्म से भटकने वालों पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि जो 33 कोटि देवी-देवताओं को छोड़कर इधर-उधर भटकते हैं, उनकी सोच पर स्वयं विचार करने की आवश्यकता है।

बाबा बागेश्वर नाथ ने मंच से बांदा को छोटी काशी और केन नदी को छोटी गंगा की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि बांदा के लोगों की भक्ति, सरलता और प्रेम अद्भुत है। करीब एक ही दिन में आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया, जो अपने आप में ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि बांदा के लोग सीधे-सादे हैं और उनका दिल बहुत बड़ा है। बाबा ने पुनः बांदा आने का भरोसा दिलाया और सभी श्रद्धालुओं पर भगवान की कृपा बने रहने का आशीर्वाद दिया।

कार्यक्रम के दौरान बाबा बागेश्वर नाथ ने 15 फरवरी को बागेश्वरधाम गढ़ा, छतरपुर में आयोजित होने वाले कन्या विवाह महोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने बताया कि बागेश्वर बालाजी की कृपा से प्राप्त चढ़ावे की राशि से वे अपने लिए मकान या मंदिर नहीं बनाते, बल्कि गरीब और जरूरतमंद बेटियों का घर बसाने का कार्य करते हैं। इस सामूहिक विवाह में तीन सौ से अधिक कन्याओं के विवाह होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों की बेटियां भी शामिल हैं।

पांच दिवसीय इस भव्य आयोजन में प्रदेश की राजनीति और संत समाज की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की। प्रमुख रूप से पूर्व सांसद एवं कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह, अयोध्या हनुमानगढ़ी के संत राजू दास महाराज, सखी के हनुमान के संत अर्पित दास महाराज, पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा, विधायक राकेश प्रताप सिंह, विधायक ओम मणि वर्मा, विधायक अभय प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुनीस, विभाग प्रचारक मनोज, जिला प्रचारक अनुराग, जिलाध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा, पूर्व चेयरमैन श्रीमती विनोद जैन, पूर्व चेयरमैन राजकुमार राज सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस पूरे धार्मिक आयोजन के मुख्य आयोजक भाजपा के कर्मठ नेता एवं बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण सिंह रहे। उनके नेतृत्व और व्यवस्थाओं की संतों, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने खुलकर सराहना की। पांचों दिनों तक लगातार महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

कथा के समापन पर बाबा बागेश्वर नाथ के सान्निध्य में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ कराया गया और बागेश्वर बालाजी के मंत्रों से श्रद्धालुओं की सामूहिक अर्जी लगवाई गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह