पूर्व उप प्रधानमंत्री लामिछाने ने अपने खिलाफ मुकदमों को वापस लेने का किया आग्रह

काठमांडू, 14 जनवरी (हि.स.)। नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष तथा पूर्व उपप्रधानमंत्री रवि लामिछाने ने अपने खिलाफ दायर कुछ मामलों को वापस लेने के लिए महान्यायाधिवक्ता कार्यालय में आवेदन दिया है। उन पर विभिन्न जिला अदालतों में सहकारी ठगी के साथ-साथ संपत्ति शुद्धीकरण (मनी लॉन्ड्रिंग) और संगठित अपराध के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से महान्यायाधिवक्ता कार्यालय से संपत्ति शुद्धीकरण और संगठित अपराध से जुड़े आरोप वापस लेने का आग्रह किया है।

रवि लामिछाने के निजी सचिव दीपक बोहरा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने हिरासत के दौरान भी अपने खिलाफ राजनीतिक पूर्वाग्रह के आधार पर लगाए गए मामलों को वापस लेने की मांग करते हुए आवेदन दिया था। अब जमानत और बैंक गारंटी पर रिहा होने के बाद उन्होंने पूरक आवेदन भी दायर किया है। निजी सचिव बोहरा के अनुसार सहकारी के धन गबन से जुड़े ठगी मामले के साथ संपत्ति शुद्धीकरण और संगठित अपराध के आरोप जोड़कर उन्हें राजनीतिक रूप से फंसाने की कोशिश की गई।

दीपक वोहरा का दावा है कि केवल सहकारी ठगी के आरोप में अधिक कठोर सजा की मांग नहीं की जा सकती थी, इसलिए संपत्ति शुद्धीकरण और संगठित अपराध के आरोप जोड़कर अधिक कैद सजा की मांग की गई। उन्होंने कहा है कि इन आरोपों के जुड़ने से 10 वर्ष से अधिक की कैद की मांग संभव हो जाती है और ऐसे मामलों में सबूत मिलने पर हिरासत में भेजने की संभावना भी मजबूत हो जाती है, जिसे वे अधिकतम राजनीतिक पूर्वाग्रह का उदाहरण मानते हैं।

पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने पर कास्की जिला अदालत में सहकारी ठगी के साथ संगठित अपराध और संपत्ति शुद्धीकरण के आरोप में मामला चल रहा है। इसी प्रकार, रुपन्देही और काठमांडू जिला अदालत में सहकारी ठगी तथा संगठित अपराध के मामले दर्ज हैं, जबकि चितवन के मामले में संगठित अपराध का आरोप नहीं जोड़ा गया है। गोर्खा मीडिया के अध्यक्ष जीवी राय सहित अन्य के साथ मिलीभगत कर सहकारी ठगी करने के आरोप में उनके खिलाफ पांच जिला अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं।

लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहे लामिछाने कुछ सप्ताह पहले उच्च अदालत बुटवल के जमानत और धरौटी संबंधी आदेश के बाद जेल से रिहा हुए थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास