भ्रष्टाचार मामले में बहाली आदेश रद्द नए सिरे से विभागीय जांच के निर्देश
- MILAN SINGH JAMWAL
- Sep 17, 2026
जम्मू, 17 सितंबर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने भ्रष्टाचार के एक मामले में निलंबित जल शक्ति विभाग के कर्मचारी नजीर अहमद मलिक की बहाली का आदेश रद्द कर दिया है। सरकार ने बहाली आदेश को शुरू से ही अमान्य करार देते हुए मामले की नए सिरे से विस्तृत विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
जल शक्ति विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश संख्या 159-जेके (जेएसडी) ऑफ 2026, दिनांक 16 सितंबर 2026 के अनुसार, नजीर अहमद मलिक तत्कालीन गेज रीडर तथा जिलेदार कार्यालय हाजिन, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण डिवीजन सुंबल में प्रभारी पटवारी के रूप में कार्यरत थे।
मलिक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो थाना बारामुला में एफआईआर संख्या 17/2022 दर्ज की गई थी। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत कथित रूप से अवैध रिश्वत मांगने और स्वीकार करने से संबंधित है। अभियोजन की मंजूरी के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
मार्च 2025 में किया गया था बहाल
मुख्य अभियंता, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण कश्मीर ने 6 मार्च 2025 को आदेश जारी कर नजीर अहमद मलिक को तत्काल प्रभाव से सेवा में बहाल कर दिया था। बहाली के साथ तीन वार्षिक वेतन वृद्धियां अदालत का अंतिम निर्णय आने तक रोकने तथा सेवानिवृत्ति तक उन्हें वित्तीय लेन-देन से जुड़े किसी संवेदनशील पद पर तैनात न करने की शर्त लगाई गई थी।
सरकार ने समीक्षा के दौरान पाया कि मुख्य अभियंता ने एक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर बहाली आदेश जारी किया था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1956 के नियम 33(4) के अनुरूप नहीं थी। इस नियम के तहत अनुशासनात्मक प्राधिकारी को स्वयं जांच करनी होती है अथवा विधिवत जांच अधिकारी नियुक्त करना होता है।
आदेश में कहा गया है कि ट्रैप केस में निलंबित कर्मचारी की बहाली का अधिकार सरकार के पास है। ऐसे मामलों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति की सिफारिश के आधार पर निर्णय लिया जाता है। इसलिए मुख्य अभियंता द्वारा जारी बहाली आदेश न केवल नियमों के विरुद्ध था, बल्कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर भी था।
बहाली आदेश शुरू से अमान्य घोषित
सरकार ने मुख्य अभियंता द्वारा जारी आदेश संख्या 161-ई ऑफ 2025 को रद्द करते हुए उसे ‘वॉइड एब इनिशियो’, यानी जारी होने की तारीख से ही अमान्य घोषित कर दिया है।
सरकार ने हाइड्रोलिक सर्किल कुपवाड़ा-हंदवाड़ा के प्रभारी अधीक्षण अभियंता शकील-उर-रहमान को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं, सिंचाई उपमंडल हाजिन के सहायक कार्यकारी अभियंता आसिफ अली भट मामले में प्रस्तुतिकरण अधिकारी होंगे।
जांच अधिकारी को आरोपों की विस्तृत जांच कर तथ्यों, निष्कर्षों और स्पष्ट सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट सरकारी आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश वित्तीय आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव, जल शक्ति विभाग शालीन काबरा द्वारा जारी किया गया है।
यह कार्रवाई विभागीय जांच से संबंधित है और आपराधिक मामले का अंतिम फैसला सक्षम अदालत द्वारा किया जाना है।

