रेखा गुप्ता ने सरकार की उपलब्धियों को किया पेश, निजी आरोपों पर सदन में भावुक हुईं

नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में अपनी सरकार के 11 महीने के कार्यकाल की उपलब्धियों को पेश करने के साथ-साथ पिछली आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार के 11 वर्षों के शासन की विफलताओं, अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की परत-दर-परत पोल भी खोलकर रख दी।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उपराज्यपाल का अभिभाषण कोई संसदीय रस्म अदायगी नहीं है बल्कि यह उस नए गवर्नेंस मॉडल का रोडमैप है, जिसमें दिल्ली को टकराव की राजनीति से निकालकर समन्वय, जवाबदेही और परिणाम आधारित शासन की ओर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली में केंद्र सरकार, उपराज्यपाल, नगर निगम और विभिन्न एजेंसियां आपसी टकराव में नहीं, बल्कि दिल्ली के विकास के लिए एकजुट होकर काम कर रही हैं।

सदन में मुख्यमंत्री भावुक भी हुईं और कहा कि विपक्ष उनकी मानवीय भूल पर जानबूझकर छींटाकशी करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को यह स्वीकार नहीं हो पा रहा है कि आज दिल्ली की मुख्यमंत्री एक महिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यही वह मॉडल है, जिसे दिल्ली सरकार पूरे आत्मविश्वास के साथ जनता के सामने रख रही है। सरकार के निर्णयों में शोर नहीं, बल्कि समन्वय है; जहां घोषणाएं नहीं, बल्कि क्रियान्वयन है और जहां सत्ता प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा का अभ्यास है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गांधी जी के सर्वोदय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय और अटल बिहारी वाजपेयी जी के राष्ट्रवाद से प्रेरणा लेकर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत-विकसित दिल्ली’ के संकल्प को साकार करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी 2025 में जब उनकी सरकार बनी, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो वर्षों के अंधकार के बाद दिल्ली में नई रोशनी की किरण आई हो। बीते 15-20 वर्षों में दिल्ली की आबादी और जरूरतें तेजी से बढ़ीं, लेकिन पिछली सरकारें बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में पूरी तरह विफल रहीं। परिणामस्वरूप सड़कें, अस्पताल, पानी, बिजली और परिवहन जैसी मूल व्यवस्थाएं लगातार चरमराती चली गईं। मुख्यमंत्री के अनुसार उनकी सरकार ने प्राथमिकताएं तय कीं, नीतियां बनाईं और शॉर्ट टर्म, मिड टर्म व लॉन्ग टर्म लक्ष्य निर्धारित कर योजनाबद्ध ढंग से काम शुरू किया। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मात्र 11 महीनों के अल्पकाल में ही दिल्ली की दिशा बदलने में सरकार सफल रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शपथ ग्रहण के पहले ही दिन आयुष्मान भारत जैसी देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना को उसी दिन कैबिनेट में मंजूरी दी गई। बीते 11 महीनों में इस योजना के तहत चार लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हुआ।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि दिल्ली सरकार ने अस्पताल सूचना प्रबंधन प्रणाली (एचआईएमसी) लागू कर पूरे सरकारी अस्पताल तंत्र को डिजिटल किया। उन्होंने कहा कि पहली बार दिल्ली स्टेट आयुष सोसायटी का गठन किया गया। इसके साथ ही स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन बनाकर ऑर्गन डोनेशन को व्यवस्थित प्लेटफॉर्म दिया गया। 29 नए जन औषधि केंद्र खोले गए, जहां सस्ती दवाइयां उपलब्ध हैं, और पांच सरकारी अस्पतालों के नए ब्लॉक शुरू किए गए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने 500 पालना केंद्र शुरू किए, जहां कामकाजी महिलाएं अपने छोटे बच्चों को सुरक्षित वातावरण में छोड़कर काम पर जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1300 नर्सिंग पद भरे गए। उन्होंने बताया कि दिल्ली में 100 अटल कैंटीन खोलने का लक्ष्य रखा गया है। 45 शुरू हो चुकी हैं, जहां 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 2025 के जरिए निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगी। ईवी बसों की संख्या बढ़ाकर 3500 की गई, जिसे 2026 तक 7500 और आगे 10,000 तक ले जाने का लक्ष्य है। पहली बार दिल्ली का अलग पब्लिक अकाउंट बनाया गया, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। इसके अलावा जीएसटी में 915 करोड़ रुपये का समयबद्ध रिफंड व्यापारियों को दिया गया।

मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिना योजना, बिना बजट और बिना नक्शे के अस्पतालों की इमारतें खड़ी कर दी गईं। लागत 200 करोड़ से 1600 करोड़ तक पहुंच गई। आज उन परियोजनाओं को सुलझाना एक बड़ा टास्क बन गया है। कई मामलों में नए टेंडर जारी करने पड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने यमुना की सफाई को लेकर भी अपना सरकार का रुख स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई एक जटिल प्रक्रिया है जिसे सतही उपायों से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के समय से चली आ रही पुरानी तकनीक और निष्क्रिय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को मुख्य चुनौती बताया। वर्तमान सरकार अब नए सिरे से पुराने प्लांट्स को ठीक कर रही है और नए एटीपी स्थापित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा और ‘सीएमश्री स्कूल’ से जुड़ी भ्रांतियों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर चल रहे किसी भी स्कूल का नाम नहीं बदला गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पिछली आआपा सरकार दिल्ली को भारी वित्तीय और प्रशासनिक देनदारियों के बोझ तले छोड़ गई थी। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, परिवहन, शिक्षा, खेल और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई विभागों में हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित थीं, जिनका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा तक नहीं छोड़ा गया। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को भुगतान, बिजली वितरण कंपनियों के बकाया, दिल्ली जल बोर्ड की वित्तीय बदहाली, अधूरी अस्पताल परियोजनाएं और बिना बजट शुरू की गई योजनाएं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

सदन में मुख्यमंत्री उस समय भावुक हो गईं, जब उनके द्वारा बोले गए एक शब्द को लेकर विपक्ष द्वारा बार-बार मजाक उड़ाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनसे एक मानवीय भूल हो सकती है, लेकिन उसे लेकर जिस तरह से जानबूझकर छींटाकशी की जा रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘मुझसे तो गलती हो गई, लेकिन आप लोग जानबूझकर ऐसा कृत्य करते हैं।‘ मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष को यह स्वीकार नहीं हो पा रहा है कि आज दिल्ली की मुख्यमंत्री एक महिला है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, ‘इनको यह अच्छा नहीं लगता कि एक महिला दिल्ली की मुख्यमंत्री है।’

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव