नशा पीड़ितों के पुनर्वास योजना के पायलट चरण की तैयारियों की समीक्षा
- Rahul Sharma
- Aug 25, 2026
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने नशा पीड़ितों के पुनर्वास एवं सामाजिक-आर्थिक पुनर्समावेशन योजना-2026 के प्रथम चरण के पायलट की तैयारियों की समीक्षा की। सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा समन्वित इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में पायलट संस्थानों एवं जिलों की तैयारी, मानव संसाधन, बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और विभागीय समन्वय की समीक्षा की गई। प्रथम चरण का पायलट आईएमएचएएनएस श्रीनगर, जम्मू और कठुआ के एटीएफ तथा बडगाम जिले में प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य पुनर्वास मॉडल को जमीनी स्तर पर लागू कर व्यावहारिक कमियों की पहचान करना, मानक संचालन प्रक्रिया को बेहतर बनाना और पूरे जम्मू-कश्मीर में इसके विस्तार के लिए आवश्यक अनुभव जुटाना है। मुख्य सचिव ने प्रत्येक पायलट स्थल पर उपलब्ध बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की समीक्षा करते हुए मेडिकल अधिकारियों, काउंसलरों, केस मैनेजरों, आशा कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने सामाजिक कल्याण विभाग को कार्यक्रम जल्द शुरू करने और अन्य जिलों में विस्तार के लिए आवश्यक मानव संसाधन व बुनियादी ढांचे की पहचान साथ-साथ करने के निर्देश दिए।
बैठक में पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रस्तावित रिहैबिलिटेशन मॉनिटरिंग पोर्टल पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र को पोर्टल का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था में प्रत्येक लाभार्थी को यूनिक डिजिटल आईडी दी जाएगी और अधिकृत अधिकारियों को उनकी भूमिका के अनुसार ही जानकारी तक पहुंच मिलेगी। बैठक में बताया गया कि पुनर्वास व्यवस्था के लिए स्क्रीनिंग, मूल्यांकन, रेफरल, काउंसलिंग, परिवार की भागीदारी, केस मैनेजमेंट और दोबारा नशे की ओर लौटने के जोखिम की पहचान जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित बहु-विषयक मानव संसाधन तैयार किया जा रहा है। आईएमएचएएनएस श्रीनगर द्वारा विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं और कई बैचों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि ‘सर्किल ऑफ केयर’ प्रशिक्षण के पहले चरण में कश्मीर संभाग के 300 से अधिक फ्रंटलाइन कर्मियों, जिनमें आशा कार्यकर्ता, एनआरएलएम/एसएचजी प्रतिनिधि और शिक्षक शामिल हैं, को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अगले चरण में जम्मू-कश्मीर के 34 बैचों में 1,020 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा उच्च माध्यमिक विद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके तहत प्रत्येक उच्च माध्यमिक विद्यालय और कॉलेज में कम से कम एक शिक्षक को संस्थान स्तर पर काउंसलर के रूप में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। इसके दायरे में जम्मू-कश्मीर के करीब 2,200 उच्च माध्यमिक विद्यालय और कॉलेज शामिल होंगे। बैठक में सामाजिक कल्याण विभाग के आयुक्त सचिव सरमद हफीज ने पायलट के क्रियान्वयन ढांचे, मानव संसाधन की जरूरत और डिजिटल निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी। आईएमएचएएनएस श्रीनगर के प्रमुख डॉ. अरशद हुसैन ने संस्थान की ओर से अब तक किए गए क्षमता निर्माण कार्यों और पायलट के तहत शामिल सुविधाओं से अवगत कराया। बैठक में एम्स नई दिल्ली के नेशनल ड्रग डी-एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर के साथ प्रस्तावित सहयोग पर भी चर्चा हुई। इसके तहत नशा मुक्ति मनोचिकित्सा, ओपिओइड एगोनिस्ट उपचार, डुअल डायग्नोसिस प्रबंधन और पुनर्वास हस्तक्षेपों के मूल्यांकन से जुड़े प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संयुक्त शोध की योजना है। मुख्य सचिव ने कहा कि पायलट चरण से प्राप्त अनुभव के आधार पर योजना को मजबूत कर पूरे जम्मू-कश्मीर में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।

