2035 तक जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत क्षमता 10,969 मेगावाट करने का रोडमैप

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत उत्पादन क्षमता को अगले एक दशक में तीन गुना से अधिक बढ़ाने की तैयारी है। सरकार ने दिसंबर 2035 तक केंद्र शासित प्रदेश की परिचालन जलविद्युत क्षमता को मौजूदा 3,540.15 मेगावाट से बढ़ाकर 10,969.65 मेगावाट करने का समयबद्ध रोडमैप तैयार किया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण और कमीशनिंग की समयसीमा तथा क्षमता विस्तार की योजना की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में 14,635 मेगावाट की पहचान की गई जलविद्युत क्षमता में से अब तक करीब 24.21 प्रतिशत का ही दोहन हो पाया है। इसमें चिनाब बेसिन की हिस्सेदारी 11,283 मेगावाट, झेलम बेसिन की 3,084 मेगावाट और रावी बेसिन की 500 मेगावाट है। सरकार ने इस क्षमता के चरणबद्ध दोहन के लिए क्षमता विस्तार की रणनीति तैयार की है, जिसका उद्देश्य बाहरी बिजली पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।
रोडमैप के तहत 2026 तक 1,000 मेगावाट पाकल दुल, 624 मेगावाट किरू और 12 मेगावाट करनाह जलविद्युत परियोजनाओं से 1,636 मेगावाट क्षमता जुडऩे का लक्ष्य है। दिसंबर 2027 तक 37.5 मेगावाट परनाई परियोजना के कमीशन होने से कुल क्षमता 5,213.65 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2028 में 540 मेगावाट क्वार और 850 मेगावाट रतले परियोजनाओं से 1,390 मेगावाट और जुडऩे की योजना है। दिसंबर 2029 तक दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढढ्ढ और उरी-ढ्ढ स्टेज-ढ्ढढ्ढ से 500 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है।
इसके बाद 2031 से 2035 के बीच 820 मेगावाट किरथाई-ढ्ढढ्ढ, 390 मेगावाट किरथाई-ढ्ढ और 1,856 मेगावाट सावलकोट जलविद्युत परियोजना समेत अन्य परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना है। इनके पूरा होने पर दिसंबर 2035 तक जम्मू-कश्मीर की कुल स्थापित जलविद्युत क्षमता 10,969.65 मेगावाट होने का लक्ष्य है।
बैठक में निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। 1,000 मेगावाट पाकल दुल परियोजना में 85 प्रतिशत भौतिक और 77.54 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है, जबकि 624 मेगावाट किरू परियोजना में 88.75 प्रतिशत भौतिक और 73.21 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हुई है। 540 मेगावाट क्वार परियोजना की भौतिक प्रगति 37.82 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 42.11 प्रतिशत बताई गई। वहीं 850 मेगावाट रतले परियोजना में 31.53 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई है।
मुख्य सचिव ने परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और निर्माण में आ रही बाधाओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित क्षमता विस्तार से उद्योग, बुनियादी ढांचे, पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए बिजली की उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है।